लखनऊ। ज्येष्ठ आमवस्या पर शनिवार घरों व मंदिरों में विधि-विधान से शनि जयंती मनायी गयी और न्याय के देवता भगवान शनि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी। सूर्य नारायण के पुत्र शनिदेव की जयंती पर शनि मन्दिरों में भक्तों ने शनिदेव का अभिषेक किया। रोली, पुष्प, फल, तिल, गुड़, चना, काला कपड़ा दूध चढ़कर भगवान शनिदेव से पार्थना की। कही कही शनि जयंती पर भण्डारे के आयोजन भी हुये। क्लार्क अवध होटल के पीछे स्थित देवरहा घाट, शनि मन्दिर, कुडियाघाट स्थित कला कोठी, हसनगंज चरही डालीगंज स्थित शनि मन्दिर में सुबह से लेकर दकर रात तक भक्तों की भीड़ लगी रही।
शनि देव सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं। पं. बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि शनि महाराज का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या के दिन हुआ था। शनि जयंती के दिन शनि देव की विशेष पूजा करने से ग्रह शांत होते हैं। इसी मंशा के चलते श्रद्धालुओ ने विषम संख्या में काली सरसों के तेल के दीपक शनि प्रतिमा के सामने और पीपल के पेड़ के नीचे जलाकर उनको नमन किया। पं. बिन्द्रेस दुबे ने बतायाकि सूर्य पुत्र भगवान शनि न्याय के देवता है इस दिन शनि पूजन व्रत और शनि की वस्तुओं का दान किया गया। गरीबों और मजदूरों की सेवा और सहायता के साथ श्रद्धालुओं ने काला वस्त्र, काला छाता, काले तिल, काली उड़द दान की। मंगलवार को भक्तों ने शनिदेव की पूजा अर्चना और तेलाभिषेक भी किया। सुबह से ही शनि मंदिरों में भक्तों की लंबी-लंबी कतार दिखायी दी। भक्तों ने मंदिरों में जाकर भगवान शनिदेव के दशर्न किये। पूजारी एंव सेवकों ने भगवान शनिदेव का पंचामृत और तेलाभिषेक किया। शनि जयंती पर भक्तों ने शनिदेव को काला तिल, और काली वस्तुएं दान की। चौक स्थित काली मंदिर में सुबह व शाम को भगवान शनि का अभिषेक किया गया और शाम को ही चौकी का आयोजन किया गया। शनि जयंती पर शनि स्त्रोत का पाठ करना बहुत उत्तम रहता है। भक्तों ने मंदिरों व घरों में ही बैठकर शनि स्त्रोत का पाठ किया। सूर्य पुत्र भगवान शनि न्याय के देवता है और सभी 9 ग्रहों में शनि ग्रह का विशेष महत्व है। इस शनि स्वरूप के प्रतीक को जल, दुग्ध, पंचामृत, घी, इत्र से स्नान कराकर उनको इमरती, तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य लगाएं। नैवेद्य से पहले उन पर अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम और काजल लगाकर नीले या काले फूल अर्पित करने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है।
शनि जयंती परभजन संध्या का आयोजन:
ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाई जाने वाली शनि जयंती मंगलवार को मनाई गई। सूर्य नारायण के पुत्र शनिदेव की जयंती पर शनि मन्दिरों में भक्तों ने शनिदेव का अभिषेक किया। रोली, पुष्प, फल, तिल, गुड़, चना, काला कपड़ा दूध चढ़कर भगवान शनिदेव से पार्थना की। कही कही शनि जयंती पर भण्डारे व भजन संध्या के आयोजन भी हुये। क्लार्क अवध होटल के पीछे स्थित देवरहा घाट, शनि मन्दिर, कुडियाघाट स्थित कला कोठी, हसनगंज चरही डालीगंज स्थित शनि मन्दिर में सुबह से लेकर दकर रात तक भक्तों की भीड लगी रही। शनिदेव के अभिषेक के बाद लोगों ने शनिदेव का रोली, चंदन, पुष्पमाला, पसाद लगाकर पूजन किया। शनि भक्तों ने न्याय के देवता शनिदेव से दया बनाये रखने की पार्थना की। शाम को जब शनि देव की आरती जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी, सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी.., के स्वर जब गूंजे तो माहौल भक्ति से सराबोर हो गया। आरती के बाद प्रसाद वितरण भी हुआ।
शिव शक्ति शनिदेव मंदिर पर हुआ भव्य भंडारा
- श्रीराम जन्म भूमि मंदिर परिसर में 14वां सुंदरकांड अनुष्ठान 23 मई को होगा
लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुआई में ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती शनिवार 16 मई पर, भव्य और दिव्य भंडारे का आयोजन किया गया। ज्योतिषीय गणना के अनुसार शनि जयंती पर शनिवार का संयोग लगभग 13 वर्षों बाद बना। यह दुर्लभ संयोग शनि पूजन अनुष्ठान के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में लेखराज मेट्रो स्टेशन के पास स्थित शिव शक्ति शनिदेव मंदिर पर पूजन अनुष्ठान के उपरांत दोपहर में भव्य और सात्विक भंडारा, वितरित किया गया। सपना गोयल ने इस अवसर पर बताया कि शनि देव हिंदू धर्म में न्याय और कर्मफल के देवता हैं, जो सूर्य देव और माता छाया के पुत्र हैं। वे नवग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण और शनिवार के स्वामी हैं। शनिदेव क्रूर नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक, गंभीर और तपस्वी हैं। वास्तव में शनिदेव कर्मफलदाता’ और ‘न्यायाधीश हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए कर्मों को शुद्ध रखना और जरूरतमंदों की मदद करना सबसे उत्तम उपाय माना जाता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अयोध्या तीर्थ श्रीराम जन्म भूमि पर बने भव्य मंदिर परिसर में 14वां सुंदरकांड महा अनुष्ठान आगामी शनिवार 23 मई 2026 को होना सुनिश्चित हुआ है। उनके अनुसार सुंदरकांड महा अभियान उत्तर प्रदेश के 42 जिलों और देश के 10 राज्यों तक पहुंच चुका है। उन्होंने देशवासियों को पांच समस्याओं से सावधान रहने का संदेश भी दिया। उनके अनुसार यह समस्याएं हैं-जनसंख्या विस्फोट, घुसपैठ, दूषित मानसिकता, विदेशी सामान और धर्म परिवर्तन। सपना गोयल का एकमात्र लक्ष्य है कि संतों और ऋषियों की पावन भूमि, भारत एक बार पुन: विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हो। भारत उत्थान के इस महा उद्देश्य की पूर्ति के लिए ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से प्रतिदिन सुंदरकांड पाठ के साथ प्रत्येक सप्ताह मंगलवार और शनिवार को नजदीकी मंदिरों में सामूहिक सुंदरकांड का आयोजन, करवाया जा रहा है। इस क्रम में सपना गोयल की अगुवाई में 23 जून 2024 को पावन तीर्थ नैमिषारण्य में भव्य सामूहिक सुंदरकांड महायज्ञ का आयोजन करवाया गया था। उसमें चालीस बसों के माध्यम से पांच हजार महिलाओं को इस अनुष्ठान में शामिल करवाया गया था। इसके उपरांत सपना गोयल की अगुवाई में बिना किसी सरकारी मदद के रात-दिन की यात्रा करके उत्तर प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में बड़े स्तर पर सुंदरकांड महायज्ञ सम्पन्न करवाए जा चुके हैं। इस महा तीर्थाटन अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड कोटद्वार के प्राचीन सिद्धबली मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी हरिद्वार, रुड़की महादेव मंदिर, प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर एवं कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगाजी घाट परिसर में भी भव्य सुंदरकाण्ड का पाठ सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इसके साथ ही बीते साल 11 सितम्बर से अयोध्या तीर्थ में प्रभु राम जी के जन्मभूमि परिसर में भी, मासिक सुंदरकांड पाठ का सिलसिला शुरू हो गया है। दूसरी ओर सेवा परमो धर्म: को बीज मंत्र मानते हुए दरिद्र नारायण की सेवा के भाव से जाड़ों में कम्बल वितरण और विभिन्न पावन अवसरों पर भंडारों का आयोजन भी किया जा रहा है।





