लखनऊ। रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण लग रहा है। जब चंद्र ग्रहण लगेगा तो चंद्रमा शनि की कुंभ राशि में होंगे। ऐसे में इस ग्रहण का रक्षा बंधन पर क्या असर होगा। क्या राखी बांधन के समय में इसके कारण बदलाव किया जाएगा। यहां इसके बारे में जानें। रक्षा बंधन का मतलब होता है सावन मास का समापन, यह 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के साथ होगा। सावन मास भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। पहले सावन की बात कर लेते हैं। इस साल सावन का पावन माह 30 जुलाई से शुरू होगा। कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया गया था, तो इससे निकले हलाहल विष से सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। इस साल सावन में दो ग्रहण पड़ रहे हैं। इनमें एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्रग्रहण। पहला सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन पड़ रहा है और दूसरा चंद्रग्रहण सावन के अंतिन दिन पूर्णिमा पर पड़ रहा है। सावन अमावस्या 12 अगस्त को है और सावन पूर्णिमा 29 अगस्त को है। दूसरा चंद्र ग्रहण -सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक ग्रहण लगेगा। चंद्रग्रहण ऐसे समय में लग रहा है जब भारत में दिन होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका धार्मिक तौर पर यह मान्य नहीं होगा। इसलिए इसका सूतक काल भी नहीं माना जाएगा। इसलिए इस दौरान रक्षा बंधन पर राखी बांधने का भी कोई समय का असर नहीं होगा। पूरे दिन किसी भी समय राखी बांध सकते हैं। इसलिए इस ग्रहण का असर ज्योतिषिय दृष्टि से तो होगा, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इस पर कोई असर नहीं माना जाएगा। इसलिए इस ग्रहण का राशियों पर तो असर होगा, लेकिन इस ग्रहण का धार्मिक तौर पर कोई असर मान्य नहीं होगा।





