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भविष्य के युद्ध सिर्फ एआई से नहीं, बल्कि संकल्प और सैनिकों के दम पर जीते जाएंगे: राजनाथ सिंह

विशाखापत्तनम। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भविष्य के युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से लड़े जा सकते हैं, लेकिन उनमें जीत अब भी राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और मजबूत सैन्य शक्ति के दम पर ही हासिल होगी। यहां आईएनएस महेंद्रगिरि को नौसेना में शामिल किए जाने के समारोह को संबोधित करते हुए सिंह ने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश भारत के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण के नए शक्ति केंद्र के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा,भविष्य के युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से लड़े जा सकते हैं, लेकिन उनमें जीत राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और सक्षम सैन्य शक्ति से ही हासिल होगी।

इसलिए मैं कहूंगा कि नयी प्रौद्योगिकियां और पारंपरिक रक्षा प्रणालियां एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं और एक-दूसरे को पूर्ण बनाते हैं। पारंपरिक प्रणालियों के बिना नयी प्रौद्योगिकियां अपने आप में अधूरी हैं। सिंह ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि नयी प्रौद्योगिकियों ने युद्ध के स्वरूप को बदल दिया है, लेकिन उन्होंने युद्ध के पारंपरिक साधनों की भूमिका को कम नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि युद्ध के बुनियादी सिद्धांतों को पूरा करने के लिए आज भी मजबूत पारंपरिक सैन्य क्षमता जरूरी है और इसका महत्व पहले जितना ही बना हुआ है। आईएनएस महेंद्रगिरि को प्रोजेक्ट 17ए नीलगिरि श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट कार्यक्रम का हिस्सा बताते हुए सिंह ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 17ए का छठा जंगी पोत है और इस कार्यक्रम के तहत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित चार युद्धपोतों में अंतिम है।

इसे एमडीएल की प्रोजेक्ट 17ए श्रृंखला का अंतिम नगीना बताते हुए रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि शिपयार्ड भविष्य में भी इसी तरह के उन्नत युद्धपोतों का निर्माण जारी रखेगा। प्रोजेक्ट 17 ए के तहत पहले शामिल किए गए जंगी पोत का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि आईएनएस नीलगिरि को जनवरी 2025 में, आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को अगस्त 2025 में, आईएनएस तारागिरि को अप्रैल 2026 में और आईएनएस दुनागिरि को जून 2026 में नौसेना में शामिल किया गया था।

इसके बाद शनिवार को आईएनएस महेंद्रगिरि भारतीय नौसेना में शामिल हुआ। सिंह ने कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरि का कुल वजन करीब 6,670 टन है और यह युद्धपोत समुद्र में अधिकतम 28 नॉट (करीब 52 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से चल सकता है। बहुउद्देशीय स्टील्थ युद्धपोत होने के कारण यह हवा से होने वाले हमलों, समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों और पानी के भीतर मौजूद पनडुब्बियों से एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है।

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