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छात्रों के भविष्य का सवाल

राजनीति कितनी असंवेदशनील होती है इसको पांच दिन बाद शुरू होने वाली नीट और जेईई की परीक्षाओं पर मचे घमासान से समझा जा सकता है। 26.5 लाख छात्र-छात्राओं ने वर्षों से तैयारी की है, विकट परिस्थिति में भी अभिभावकों ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए गाढ़ी कमाई पढ़ाने पर, उनकी कोचिंग और किताबों पर खर्च किया है।

आज जब एक-एक नौकरी मिलना कठिन है तब अगर कोरोना के कारण शिक्षा एवं परीक्षा को पूरी तरह से रोक दिया जाता है, देश को लॉकडाउन जैसी स्थिति में रखा जाता है तो 26.5 लाख छात्रों, हजारों कालेजों, उनके शिक्षकों का क्या हाल होगा, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। तमाम स्कूल कालेज बंद हो जायेंगे। शिक्षक बेरोजगार हो जायेंगे और पूरा शिक्षा सत्र शून्य हो जायेगा।

इससे देश को मिलने वाले लाखों डॉक्टर, इंजीनियर नहीं मिलेंगे। शिक्षा सत्र शून्य होता है तो अगले शिक्षा सत्र में इन परीक्षाओं में छात्रों की संख्या 53 लाख हो जायेगी और फिर एक-एक सीट पर इतनी गलाकॉट प्रतिस्पर्धा होगी जिसका अनुमान लगाना कठिन नहीं है। जहां तक छात्रों की सुरक्षा की बात है, तो पार्टियों, नेताओं, बुद्धिजीवियों एवं एक्टिविस्ट की यह चिंता जायज है।

इसलिए छात्रों के परीक्षा केन्द्र पर पहुंचने, आवश्यक सुरक्षा प्रबंध के साथ भीड़भाड़ से बचाव के लिए भी सरकार को इंतजाम करना चाहिए। जहां तक राजनीति की बात है, तो देश में राजनीतिक मुद्दों और समस्याओं की कोई कमी नहीं है। अगर इन समस्याओं पर केन्द्र एवं राज्य मिलकर काम करें तो बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

जेईई-नीट परीक्षाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है और कोर्ट की हरी झंडी के बाद ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी अर्थात एनटीए ने आगामी परीक्षाओं के लिए अधिसूचना जारी की है। आखिर कोरोना के कारण देश को कब तक रोका जा सकता है। विपक्ष ही कह रहा है कि लॉकडाउन के कारण 12 करोड़ बेरोजगार हो गये। अब अगर 68 दिन के लॉकडाउन में यह हाल है, तो और अधिक दिनों तक सब कुछ बंद रखा जाता है तो ऐसी भयावह स्थिति होगी जिसकी कल्पना भी कठिन है।

इसलिए कोरोना के इलाज का बेहतर प्रबंध हो, जांच बढ़ाई जाये और रोकथाम के उपाय हों। लेकिन अब देश को बंद न किया जाये। सभी जरूरी-गैर जरूरी चीजों को खोला जाये ताकि कोराबार शुरू हो सके। कई देशों ने लॉकडाउन नहीं किया और कोरोना के मामले में वहां भारत से बेहतर स्थिति है।

इसलिए कोरोना से निपटने के लिए बंदी ही एकमात्र उपाय नहीं है। जहां तक जेईई-नीट की परीक्षा की बात है तो एनटीए के मुताबिक 99 फीसद छात्रों को अपनी पहली पसंद के परीक्षा केन्द्र आवंटित किये गये हैं, जेईई मेन्स की परीक्षा 12 पालियों में होगी और प्रति पाली महज 85000 छात्र परीक्षा देंगे।

एक कमरे में 12 छात्र होंगे और परीक्षा केन्द्रों पर थर्मल स्क्रीनिंग, सेनेटाइजर, मॉस्क की व्यवस्था भी होगी। बुखार या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अलग कमरे में बैठाया जायेगा। इस तरह एनटीए ने संक्रमण रोकने के लिए पर्याप्त उपाय किये हैं और यह उचित भी है। कोरोना के डर से देश कब तक बंद रहेगा? अब समय आ गया है कि सुरक्षा उपायों के साथ देश को आगे बढ़ना चाहिए। बंदी कोरोना का समाधान नहीं है बल्कि इससे समस्याएं और विकट होंगी।

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