लखनऊ। बाला प्रीतम साहिब श्री गुरु हरिकिशन साहिब जी महाराज का प्रकाश पर्व जन्मोत्सव मनाया गया। बाला प्रीतम साहिब श्री गुरु हरिक्रिशन साहिब जी महाराज का प्रकाश पर्व जन्मोत्सव मंगलवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी नाका हिंडोला लखनऊ में बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शाम का विशेष दीवान 6:15 बजे श्री रहिरास साहिब के पाठ से आरम्भ हुआ जो रात्रि 09:30 बजे तक चला। जिसमें रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह जी ने अपनी मधुरवाणी में शबद कीर्तन गायन एवं नाम सिमरन करवाया। ज्ञानी सुखदेव सिंह जी ने साहिब श्री गुरु हरिक्रिशन साहिब जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि साहिब श्री गुरु हरिक्रिशन साहिब जी महाराज का जन्म आज ही के दिन कीरतपुर में हुआ था। आपके पिता जी का नाम श्री हरिराय जी व माता जी का नाम कृष्ण कौर जी था। श्री गुरु हरिराय ने अपने बड़े बेटे को गद्दी न देकर अपने छोटे बेटे श्री हरिक्रिशन जी में प्रभु भक्ति एवं गुणों को देखकर उन्हें ही गद्दी पर आसीन किया। आप सभी दस गुरुओं के सबसे छोटी उम्र में गुरु गद्दी पर आसीन हुए। इसी लिए आप को बाला प्रीतम के नाम से भी जाना जाता है।
एक बार जिला अम्बाला के पंजखोरे गांव में एक पंडित कृष्ण लाल ने छोटे से बालक को गुरु मानने से इन्कार करते हुए कहा कि यदि गुरु जी गीता के श्लोकों का अर्थ वधकरके दिखायें तो मै इन्हें गुरु मान लूँगा। गुरु जी ने कहा आप किसी को ले आएं श्री गुरु नानक की कृपा दृष्टि की तसल्ली मै करवा दूँगा। पंडित एक महा मूर्ख को ले आया। गुरु जी की कृपा से वह मूर्ख एक विद्वान की तरह गीता के श्लोकों का अर्थ सुनाने लगा इससे गुरु जी की महिमा पहले से भी ज्यादा फैल गयीं। गुरु जी दिल्ली में ही थे कि चेचक की बीमारी सारे इलाके मे फैल गयी। गुरु जी ने गरीबों, दुखियों की सहायता करनी शुरू कर दी। एक दिन गुरु जी को तेज बुखार हुआ। आपके शरीर पर चेचक के लक्षण दिखाई देने लगे। अपना जाने का समय नजदीेक जान कर साध संगत को आदेश दिया कि बाबा बकाला जिसका भाव था कि हमारे बाद गुरु गद्दी की जिम्मेदारी संभालने वाला महापुरुष गांव बकाले अमृतसर में है। यह कह कर आठ वर्ष की आयु में आप गुरुपुरी सिधार गये जिस स्थान पर आपका अन्तिम संस्कार हुआ वहाँ अब गुरुद्वारा बाला साहिब है। विशेष रुप से पधारे रागी जत्था भाई रनधीर सिंह जी हजूरी रागी गुरुद्वारा यहिया गंज वालों ने शबद कीर्तन श्री हरिक्रिशन धियाइएै जिस डिठ्ठे सब दुख जाय। गायन कर समूह साध संगत को निहाल किया। दीवान की समाप्ति के पश्चात लखनऊ गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी नाका हिंडोला, लखनऊ के अध्यक्ष स. राजेन्द्र सिंह बग्गा ने आई साध संगत को साहिब श्री गुरु हरिक्रिशन साहिब जी महाराज के प्रकाश पर्व जन्मोत्सव की बधाई दी कार्यक्रम का संचालन स. सतपाल सिंह मीत ने किया समाप्ति के उपरान्त हरमिन्दर सिंह टीटू की देखरेख में गुरु का लंगर श्रधालुओं में दशमेश सेवा सोसाइटी के सदस्यों द्वारा वितरित किया गया।
यहियागंज में शबद कीर्तन सुन संगत हुई निहाल
लखनऊ। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी यहियागंज में मंगलवार सायं 7 बजे से 10 बजे तक श्री गुरु हरकिशन साहिब जी का प्रकाश पर्व श्रद्धा एवं सत्कार से मनाया गया। गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि डॉक्टर गुरमीत सिंह के संयोजन मे विशेष रुप से गुरुद्वारा बंगला साहिब दिल्ली से आए भाई अमनदीप सिंह जी ने शबद कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया। ज्ञानी जगजीत सिंह जाचक ने श्री गुरु हरकिशन साहब जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा गुरू हर किशन साहिब जी का जन्म कीरतपुर साहिब में हुआ। वे गुरू हर राय साहिब जी के दूसरे पुत्र थे। 8 वर्ष की अल्प आयु में गुरू हर किशन साहिब जी को गुरुपद प्रदान किया गया। गुरु हर राय जी ने गुरु हरकिशन जी को अष्ठम् गुरू के रूप में स्थापित किया। गुरसिखों एवं राजा जय सिंह के बार-बार आग्रह करने पर वो दिल्ली जाने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद पंजाब के सभी सामाजिक समूहों ने आकर गुरू साहिब को विदायी दी। उन्होंने गुरू साहिब को अम्बाला के निकट पंजोखरा गांव तक छोड़ा। इस स्थान पर गुरू साहिब ने लोगों को अपने अपने घर वापिस जाने का आदेश दिया। गुरू साहिब अपने परिवारजनों व कुछ सिखों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुये। परन्तु इस स्थान को छोड़ने से पहले गुरू साहिब ने उस महान ईश्वर प्रदत्त शक्ति का परिचय दिया।





