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पीएम केयर्स फंड पर आपत्तियां खारिज

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को कोविड-19 से लडऩे के लिए पीएम केयर्स फंड में मिली दान की राशि को राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) में स्थानांतरित करने का निर्देश देने से मंगलवार को इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की तीन सदस्ईय पीठ ने एक गैर सरकारी संगठन की याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनाए गए अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष में स्वेच्छा से योगदान किया जा सकता है क्योंकि आपदा प्रबंधन कानून के तहत ऐसा कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है।

गैर सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस ने इस जनहित याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया था कि कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए पीएम केयर्स कोष में जमा राशि एनडीआरएफ में स्थानांतरित करने का निर्देश केन्द्र को दिया जाए। याचिका में कोविड-19 महामारी से निबटने के लिए आपदा प्रबंधन कानून के तहत राष्ट्रीय योजना तैयार करने, इसे अधिसूचित करने और लागू करने का निर्देश सरकार को देने का भी अनुरोध किया गया था।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन कानून के तहत तैयार की गई योजना कोविड-19 के लिए पर्याप्त है। केंद्र ने कोविड-19 महामारी जैसी आपात स्थिति से निबटने और प्रभावित लोगों को राहत उपलब्ध कराने के इरादे से 28 मार्च को प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं राहत (पीएम केयर्स) कोष की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री इस पीएम केयर्स फंड के पदेन अध्यक्ष हैं और रक्षामंत्री, गृहमंत्री और वित्तमंत्री पदेन न्यासी हैं।

इस याचिका पर 27 जुलाई को सुनवाई के दौरान केन्द्र ने पीएम केयर्स कोष का पुरजोर बचाव करते हुए कहा था कि कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए यह स्वैच्छिक योगदान का कोष है और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष तथा राज्य आपदा मोचन कोष के लिए बजट में किए गए आबंटन को हाथ भी नहीं लगाया गया है। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि पीएम केयर्स फंड एक स्वैच्छिक कोष है जबकि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के लिए बजट के माध्यम से धन का आबंटन किया जाता है।

याचिकाकर्ता संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा था कि वह इस कोष के सृजन का लेकर सदाशयता पर किसी प्रकार का संदेह नहीं कर रहे हैं लेकिन पीएम केयर्स फंड का सृजन आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों के खिलाफ है। दवे का कहना था कि राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट किया जाता है लेकिन सरकार ने बताया है कि पीएम केयर्स फंड का निजी ऑडिटर्स से ऑडिट कराया जाएगा।

उन्होंने इस कोष की वैधता पर भी सवाल उठाया था और कहा कि यह संविधान के साथ धोखा है। सॉलिसीटर जनरल का कहना था कि 2019 में एक राष्ट्रीय योजना तैयार की गई थी और इसमें जैविक आपदा जैसी स्थिति से निबटने के तरीकों को शामिल किया गया है। मेहता ने कहा था, उस समय किसी को भी कोविड के बारे में जानकारी नहीं थी। यह जैविक और जन स्वास्थ्य योजना है जो राष्ट्रीय योजना का हिस्सा है। अत: कोई राष्ट्रीय योजना नहीं होने संबंधी दलील गलत है।

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