नई दिल्ली। वैज्ञानिकों को पश्चिमी हिंद महासागर में रह रहीं नीली व्हेल की नई संख्या के बारे में पता चला है, जिनके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने इस क्षेत्र की ध्वनि रिकॉर्डिंग के विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया। इससे दुनियाभर में इस सबसे बड़े प्राणी की मौजूदगी की बात पुख्ता होती है। ये अत्यधिक लुप्तप्राय स्तनधारी दुनिया भर में सभी महासागरों में पाए जाते हैं और इनकी आवाज बहुत धीमी होती है।
इस शोध में अमेरिका के न्यू इंग्लैंड एक्वेरियम के शोधकर्ता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि हर जगह की ब्लू व्हेल की अलग और अनोखी आवाज होती है। हाल ही में एंडेन्जर्ड स्पीशियस रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने ओमान के अरब सागर तट से लेकर दक्षिणी मेडागास्कर तक की ध्वनि रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया और नीली व्हेल की आवाज सुनी, जिसे पहले कभी नहीं सुना गया था। शोधकर्ताओं ने विश्लेषण के आधार पर कहा कि उन्हें पश्चिमी हिंद महासागर में नीली व्हेल के बारे में जानकारी मिली है, जिनके बारे में संभवत: पहले पता नहीं लगाया गया था।





