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जो सूची से बाहर हैं

असम में वैध-अवैध जनसंख्या को लेकर वर्षों से बहस चल रही है। इस पर जितनी चर्चा हुई समस्या उलझती ही गयी है। यहां नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन्स 1951 से है,  लेकिन कभी अपडेट नहीं किया गया। जब बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था और पाकिस्तान से की आजादी की मांग हो रही थी, तब पाकिस्तानी फौजों ने बांग्लादेश में अमानवीय अत्याचार और खून खराबा किया। पाकिस्तानी सैनिकों ने बांग्लादेश में तीस लाख से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। 1970 के बाद पाकिस्तान के जुल्मों से बचने के लिए बड़ी संख्या में बांग्लादेशी पलायन करके असोम में आ गये और यहीं पर रोजी-रोजगार करने लगे। बाद में इनके परिजन और रिश्तेदार भी असोम में आये और यहीं बस गये। बांग्लादेशी लोगों का भारत में आना और रोजगार करना न तो कोई नहीं बात है और न ही गैर कानूनी है, लेकिन जब कोई बिना किसी रिकार्ड के रहने लगता है, विधि व्यवस्था बनाये रखने की वाली एजेंसियों की पहुंच से दूर होता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष अनेक खतरे पैदा हो जाते हैं। भारत आतंकी हिंसा से पीड़ित है और आज भी आंतरिक सुरक्षा की स्थिति बहुत ही नाजुक है। इस संवेदनशील स्थिति के कारण ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसी की निगरानी में असोम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को अपडेट करने का काम शुरू हुआ।

 

30 जुलाई 2018 को जब एनआरसी का अंतिम ड्राफ्ट जारी किया गया तो 40.37 लाख लोगों का नाम नहीं था। एनआरसी ड्राफ्ट में जिन लोगों का नाम नहीं आया उनको किसी भी तरह से परेशान करने या सुविधाएं बंद करने के बजाय सरकार ने एक और मौका नागरिका साबित करने के लिए दिया। एनआरसी ड्राफ्ट से बाहर लोगों को 2500 नागरिकता सेवा केन्द्रों के माध्यम से अपने दावे, आपत्तियां और दस्तावेज जमा करने का मौका दिया गया। दावों और अपत्तियों को सुलझाने के बाद एनआरसी की अंतिम सूची जारी की गयी तो असोम के 3.21 करोड़ की आबादी में 3.11 करोड़ लोग ही वैध नागरिक पाये गये। 1906657 लोग अंतिम नागरिकता सूची से बाहर हो गये हैं। जिन लोगों का नाम एनआरसी में नहीं है वे विदेशी ट्रिब्यूनल के सामने अपनी आपत्तियां और दावे को रख सकते हैं। अगर ट्रिब्यूनल के फैसले से भी असंतुष्ट हैं तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं। नागरिकता सूची में जिनका नाम नहीं है उसमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्होंने नागरिकता सेवा केन्द्रों में दावे ही नहीं किये हैं।

 

यह भी कि सूची से बाहर मुसलमान और हिन्दू दोनों धर्मों से हैं। इसलिए किसी भी पार्टी या संगठन को इस तरह की अफवाह नहीं फैलानी चाहिए कि जिनका नाम नहीं है उनको देश निकाला दिया जा रहा है या फिर यह किसी धर्म विशेष के खिलाफ है या भाजपा का एजेंडा है। एनआरसी अपडेट करने का पूरा काम अदालत के आदेश और उसकी निगरानी में हो रहा है और जिनको आपत्ति है वे अदालत जा भी सकते हैं। भारत के संविधान में जीवन और रोजी-रोजगर की गारंटी दी गयी है और यह भारत के नागरिक पर ही नहीं बल्कि भारतीय सम्प्रभुता की सीमाओं में सभी पर लागू होती है। इसलिए जो लोग नागरिकता सूची से बाहर हैं उनको कानूनी मदद मिलनी चाहिए। जीवन रक्षा और रोजगार का अधिकार सबको है और यह एनआरसी की सूची से बाहर के लोगों पर भी लागू है।

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