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‘अइहैं अब अवध जगदीशा’

लखनऊ। अयोध्या में बुधवार को जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर की आधारशिला रख रहे थे तो उसी समय अयोध्या के मंदिरों से गूंज रही थीं यह पंक्तियां-
‘हिंदू कहें विश्व के ईशा, अइहैं अब अवध के जगदीशा
बहु दिन बीत गये रघुराई, शुभ दिन शुभ मुहूरत आयी
भयो धन्य सकल समुदायी, धन्य धन्य भई धरती माई।’

अर्थात अब जब शुभ मुहूर्त आ ही गया है तो बहुत दिनों के बाद अवध में रामलला भी आ जायेंगे। इससे समस्तजनों के साथ ही धरती माता भी धन्य हो जायेंगी।

यह पंक्तियां भी गूंज रही थीं-
‘अवधपुरी यह प्रभु यह आवत जानी, भई सकल शोभा कै खानी
भहइ सुवाहन भिबिध समीरा, भई सरजू अति निर्मल नीरा।’ अर्थात प्रभु को आते जानकर अवध पुरी संपूर्ण शोभाओं का भंडार हो गयी है। तीनों प्रकार की सुंदर वायु बहने लगी। सरयू जी अति निर्मल जल वाली हो गयीं।

बुधवार को अयोध्या में ही नहीं पूरे प्रदेश में चहुंओर शंख ध्वनि, घंटा-घड़ियाल, ढोल-ताशों और आरती के सुमधुर स्वरों के बीच मानों भेता युग का संचार हो रहा था। यह सिर्फ राम मंदिर की आधार शिला रखना भर नहीं था, वरन मानो भारत का प्रारब्ध तय हो रहा था। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा भी कि राम मंदिर भारतीय संस्कृति का आधुनिक प्रतीक होगा। पूरे देश और प्रदेश में लोग कोरोना संकटकाल में अयोध्या जाने से विरत रह गये परंतु उनके दिल में तो राम नाम ही धड़क रहा था। घरों में पूजा-पाठ, रामायण और भजनों की धुन संपूर्ण वातावरण को गुंजायमान कर रही थी। हर व्यक्ति इस उधेड़बुन में था कि कैसे वह जल्दी से जल्दी राम मंदिर स्थल पहुंचकर अपने आराध्य को शीष नवा सके।

कहने को तो मोदी ने आधार शिला रखी, लेकिन 15वीं सदी से चले आ रहे और सवा सौ सालों से मुकदमों के जाल में फंसे इस मुद्दे को प्राण तब मिले जब विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंहल ने 1984 में राम जन्म भूमि आंदोलन की शुरुआत की थी। इस मंदिर की आधारशिला रखे जाने के साथ ही सर्वधर्म समाज की स्थापना का युग भी शुरू होगा, ऐसा अयोध्या के विद्वतजन तो मानते ही हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसे अपने संबोधन में रेखांकित किया। कहा कि राम सबके हैं और सबमें हैं। राम ही सत्य हैं और इसीलिए हमारे मन में बसें हैं। पूरी दुनिया में उनके अनुयायी हैं। बताया कि राम समय, स्थान और परिस्थितियों के हिसाब से बोलते हैं, सोचते हैं और करते हैं। राम हमें समय के साथ बढ़ना सिखाते हैं, चलना सिखाते हैं, राम परिवर्तन के पक्षधर हैं, राम आधुनिकता के पक्षधर हैं। उनकी इन्हीं प्रेरणाओं के साथ, श्रीराम के आदर्शों के साथ भारत आज आगे बढ़ रहा है। सारे संकेत तो दे गये प्रधानमंत्री।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो पहले ही कह दिया था कि यह केवल शिलान्यास कार्यक्रम नहीं, बल्कि नये युग की शुरूआत है, तो जाहिर है कि रामराज्य की उस परिकल्पना पर कार्य भी होगा जो चोरी-छिकारी, डकैती, लूट-अपहरण, हत्या जैसी कलंकित करने वाली हरकतों से विमुख था। सबको न्याय, निर्दोष के साथ अन्याय नहीं, दोषी को बख्शेंगे नहीं की अवधारणा पर हमारा देश और प्रदेश तभी बढ़ेगा, जब वास्तविक रूप में अपराधविहीन रामराज्य का सपना साकार होगा।

मोदी ने रामराज्य और उसकी सोच तथा कल्पना को अपने शब्दों से बखूबी उकेरा भी। आज मंदिर भूमि पूजन के साथ ही यह आशा बलवती हुई है कि हमारा देश और प्रदेश एक ऐसे नये युग में प्रवेश करेगा, जहां धर्म, जाति और पंथ का भेद गौण होगा तथा हम समरसता की ओर कदम आगे बढ़ायेंगे।

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