वुहान से निकला कोरोना वायरस मानवता के सामने एक बड़ा संकट बन गया है। लोग बीती सदियों में महामारियों के दौरान हुई मौतों आंकड़ों को याद कर सिहर जाते हैं। कोरोना के फैलाव की गति इतनी तेज है कि इससे बचना कठिन साबित हो रहा है। चीन, अमरीका, इटली, जापान, कोरिया जैसे देशों में लॉकडाउन है।
करोड़ों लोगों के रोजगार खत्म हो गये हैं। कोरोना के भयानक संकट से अभी तक दक्षिण एशिया के देश बचे हुए थे, लेकिन अब जिस गति से कोरोना का प्रसार दक्षिण एशियाई देशों में हो रहा है वह अत्यंत चिंता का विषय है। इस संकट से निपटने के वास्ते साझा रणनीति बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन अर्थात सार्क देशों के नेताओं के साथ वीडियो कान्फे्रंसिंग के जरिये विचार विमर्श करने की पहल की। मोदी की इस पहल का सभी सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों ने स्वागत किया।
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद इब्राहिम सालेह ने भारत की मदद के लिए आभार जताया, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेशी नागरिकों को निकालने के लिए मोदी को धन्यवाद दिया तो नेपाल के प्रधानमंत्री और श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भी भारत के इस पहल की जमकर तारीफ की। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने टेलीमेडिसिन का ढांचा तैयार करने और सीमाओं के सील होने पर अफगानिस्तान में आवश्यक वस्तुओं की कमी को लेकर अपनी चिंता सार्वजनिक की। सभी देशों एवं उनके प्रमुखों ने अपने मूल्यवान सुझावों के जरिये कोरोना संकट से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति ने में मदद की।
प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना के गंभीर संकट को सार्क प्रमुखों के सामने रखते हुए इससे निपटने के लिए भारत के प्रयासों को साझा किया। मोदी ने 1400 फंसे भारतीयों को दूसरे देशों से निकालने, पड़ोसी देशो के नागरिकों को भी निकालने के साथ सार्क देशों को मदद करने और कोरोना से निपटने के लिए एक करोड़ डॉलर का फंड बनाने का भी प्रस्ताव किया। इसमें सभी देश अपनी इच्छा से सहयोग कर सकते हैं।
एक बड़े राष्ट्र के रूप में भारत ने सबकी मदद के साथ ही साझा प्रयास करने का भी प्रस्ताव किया। संकट के समय यह जरूरी भी है। लेकिन पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री और इमरान खान के प्रतिनिधि डा. जफर मिर्जा ने मानवीय संकट की घड़ी में जिस तरह सार्क के मंच का उपयोग चीन व इमरान खान की तारीफ करने और कश्मीर व धारा 370 को उठाने के लिए किया वह अत्यंत निंदनीय है।
पाकिस्तान आतंकियों को पालने पोसने वाला राष्ट्र तो है ही लेकिन उसे कूटनीतिक शिष्टाचार भी नहीं पता है। इसीलिए वह चाहे आर्थिक सम्मेलन हो, मानवीय मसला हो या बहुपक्षीय मुद्दे , वह हमेशा कश्मीर राग ही गाता है। दरअसल जो पाकिस्तान आतंकी भेजकर खून खराबा करता है उसे मानवीय मूल्यों का ज्ञान नहीं है। इसीलिए उसने अपने नागरिकों को नहीं बचाया और अब कोरोना से निपटने में भी असफल साबित होने वाला है, क्योंकि वह इस संकट के प्रति गंभीर नहीं लगता है।





