लखनऊ। पर्वतीय महापरिषद, लखनऊ द्वारा आज पर्वतीय महापरिषद भवन, गोमती नगर विस्तार, में कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर श्रद्धांजलि समारोह एवं कैण्डिल मार्च का आयोजन सैनिक प्रकोष्ठ के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये उनके शौर्य को नमन किया। अध्यक्ष गणेश चन्द्र जोशी ने शहीदो को नमन करते हुए कहा कि शहीदों का बलिदान राष्ट्र व समाज सदैव याद रखता है। महासचिव महेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि श्रद्धांजलि सभा के बाद उपस्थित पदाधिकारियों एवं कार्यकतार्ओं ने कारगिल शहीदों की याद में कैंडल मार्च निकाला तथा कारगिल शहीद अमर रहे व भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा तब तक शहीदों का नाम अमर रहेगा के नारे लगाए। कैण्डल मार्च में बड़ी संख्या में पर्वतीय महापरिषद के महिला प्रकोष्ठ, सैनिक प्रकोष्ठ, युवा प्रकोष्ठ, धार्मिक प्रकोष्ठ, साहित्यिक प्रकोष्ठ, चिकित्सा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा उत्साह व उमंग के साथ भाग लिया। संयोजक के0 एन0 चंदोला, सैनिक प्रकोष्ठ के प्रभारी जी0डी0 भट्ट, प्रकोष्ठ के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह धामी, प्रकोष्ठ महासचिव हरीश चन्द्र जोशी सहित पर्वतीय महापरिषद के सैनिक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों द्वारा कैण्डिल मार्च का नेतृत्व किया गया। मुख्य अतिथि सेवा निवृत्त मेजर जनरल (डॉ0) राजीव पंत सेना मेडल द्वारा इस अवसर पर वीर नारियों को सम्मानित किया गया जिनमें शहीद हरेन्द्र सिंह देवपा की पत्नी श्रीमती नन्दी देवी, शहीद लक्ष्मण सिंह की पत्नी श्रीमती शान्ती देवी, शहीद अमरजीत कुमार की पत्नी शोभा देवी व शहीद दर्शन पाल की पत्नी आनन्दी देवी पाल को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सैनिक प्रकोष्ठ के प्रभारी जी0डी0 भट्ट, सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष- लक्ष्मण सिंह धामी, सैनिक प्रकोष्ठ के महासचिव हरीश चन्द्र जोशी, पदम सिंह, के0एस0 बोरा, बीरेन्द्र सिंह बिष्ट, प्रेम सिंह बिष्ट, भूपाल सिंह मेहता, प्रेम गिरी, सहित अनेक सैनिक उपस्थित थे। इस अवसर पर सांस्कृतिक सचिव गोविन्द सिंह बोरा के दल ने वीरता पर आधारित कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। इस अवसर पर संरक्षक एन0के0 उपाध्याय, बिशन दत्त जोशी, के0 एन0 पाण्डेय, महेन्द्र पन्त, के0एस0 रावत, धन सिंह मेहता अनजान, शंकर पाण्डेय, गोविन्द सिंह बोरा, आनन्द सिंह कपकोटी, देवेन्द्र मिश्रा, चित्रा काण्डपाल, राधिका बोरा, भारती काण्डपाल, घनानन्द पाण्डेय मेघ सहित अनेक गणमान्य जन कैण्डिल मार्च में शामिल हुए।





