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मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर के नये उपराज्यपाल के तौर पर ली शपथ

श्रीनगर। पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के नये उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ग्रहण की। वह पहले राजनीतिक नेता हैं, जिन्होंने केंद्र शासित प्रदेश का प्रभार संभाला है।

जम्मू-कश्मीर की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल ने राज भवन में आयोजित, सादगीपूर्ण एक कार्यक्रम में उन्हें पद की शपथ दिलाई। सिन्हा को ग्रामीण इलाकों में लोगों से उनके जुड़ाव के लिए जाना जाता है।

सिन्हा ने शपथ लेने के बाद संवाददाताओं से कहा, “पांच अगस्त जम्मू-कश्मीर के इतिहास में बहुत खास दिन है। कई वर्षों के अलगाव के बाद, जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल हुआ। मुझे बताया गया कि कई काम जो वर्षों में पूरे नहीं हुए थे उन्हें पिछले एक साल में पूरा कर लिया गया।”

उन्होंने कहा, “मैं उस विकास को गति देना चाहता हूं।” 61 वर्षीय सिन्हा ने पूर्व आईएएस अधिकारी गिरीश चंद्र मुर्मू की जगह ली है जिन्होंने बुधवार रात इस्तीफा दे दिया था। मुर्मू को बृहस्पतिवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) नियुक्त किया गया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस इस समारोह से दूर रही जिसमें फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला दोनों आमंत्रित थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि लोकतंत्र की प्रक्रिया हिरासत में लिए गए नेताओं के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की रिहाई के साथ शुरू होनी चाहिए।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक नेता ने कहा कि पांच अगस्त को हमें बैठक की इजाजत नहीं दी गई। “दो दिन बाद, हमसे शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने को कहा जा रहा है।”

शपथ ग्रहण कार्यक्रम में फारूक खान, बशीर खान समेत पूर्व उपराज्यपालों के सलाहकार रहे अन्य लोग, वरिष्ठ नौकरशाह एवं पुलिसकर्मी मौजूद रहे। राज्यसभा सदस्य नजीर अहमद लवाय, भाजपा से लोकसभा सदस्य जुगल किशोर शर्मा और जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के नेता गुलाम हसन मीर भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

सिन्हा को जिन अहम मुद्दों को देखना होगा उनमें केंद्र शासित प्रदेश में नौकरशाही में गुटबाजी को समाप्त करना शामिल है। हाल में कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सार्वजनिक तौर पर जुबानी जंग में उलझते हुए दिखे थे।

इसके अलावा उनके सामने राज्य के खुफिया विभाग में सुधार लाने की भी चुनौती होगी जो घटनाओं का पूर्व अनुमान लगाने में विफल रहा है। पिछले तीन दिनों में, दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में पंचायत के एक सदस्य और सरपंच पर हमला हुआ।

अधिकारियों ने बताया कि सिन्हा दोपहर बाद सभी प्रशासनिक सचिवों की बैठक लेंगे। ‘विकास पुरुष’ के नाम से विख्यात सिन्हा तीन बार लोकसभा सदस्य रहे हैं हैं जो 2016 में में संचार राज्यमंत्री थे जब संचार उद्योग स्पेक्ट्रम की बिक्री में जुटा था। वह 1996 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए और उन्होंने 1999 में दोबारा जीत हासिल की। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तीसरी बार जीत दर्ज की। हालांकि, 2019 में वह गाजीपुर से चुनाव हार गए थे।

प्रौद्योगिकी संस्थान (जिसे अब आईआईटी-बीएचयू के नाम से जाना जाता है) से सिविल इंजीनियिरंग में बीटेक डिग्री धारक, सिन्हा को टेलीकॉम संचालकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर कॉल ड्रॉप की समस्या से निपटने का श्रेय दिया जाता है। वह पहले राजनेता हैं, जिन्हें केन्द्र शासित प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

केंद्र ने इससे पहले, नेता रह चुके, सत्यपाल मलिक को भूतपूर्व राज्य का राज्यपाल बनाया था जिसे पिछले साल पांच अगस्त को दो केंद्रशासित प्रदेशों – लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में विभाजित कर दिया गया था।

उत्तर प्रदेश में 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा के 403 में से 265 सीटें जीतने के बाद सिन्हा, प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे थे।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के मोहनपुरा में जन्मे सिन्हा ने अपना राजनीतिक करियर 1982 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय छात्र संघ का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद शुरू किया था और वह पिछड़े गांवों के लिए काम करने में सक्रिय रहे।

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