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लॉकडाउन : मजदूरों की किल्लत लाई किसानों की पेशानी पर बल

लखनऊ। फरवरी-मार्च में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल बरबाद होने से बेजार किसानों के लिए अब कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर लागू लॉकडाउन से उपजे हालात ने और भी गंभीर संकट पैदा कर दिया है। आमतौर पर वैशाखी से पहले ही गेहूं की फसल अनाज मंडियों में आनी शुरू हो जाती है। मगर इस बार लॉकडाउन के कारण फसल की कटाई में ही देर हो रही है।

लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में मजदूर अपने-अपने घर लौट गए हैं, लिहाजा किसानों को फसल कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने सोमवार को भाषा को बताया, फसल काटने के लिए मजदूर नहीं मिलने की समस्या बहुत बड़ी है। इससे बहुत फर्क पड़ रहा है। कहीं-कहीं स्थानीय स्तर पर कुछ मजदूर भले ही मिल जाएं लेकिन सभी जगह ऐसा नहीं हो पा रहा है।

हालांकि सरकार ने कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन से फसल कटवाने को कहा है लेकिन यह हर जगह के लिए व्यावहारिक नहीं है। बहुत जगहों पर किसानों की फसल तेज हवा के कारण लेट गई है। वहां तो हाथ से ही कटाई सम्भव होगी। उन्होंने कहा, कोरोना वायरस संक्रमण के डर से प्रदेश के लाखों प्रवासी मजदूर अपने घर बिहार और झारखण्ड लौट गए हैं। इसकी वजह से किसानों को दिक्कत आ रही है। उन्हें मजबूरन ज्यादा पैसे देकर स्थानीय मजदूरों को बुलाना पड़ रहा है।

कटाई के दिनों में आमतौर पर छोटे कारखानों में काम करने वाले प्रवासी और दिहाड़ी मजदूर गांवों में किसानों के साथ काम करते थे लेकिन लॉकडाउन के कारण वे उपलब्ध नहीं हैं। टिकैत ने कहा कि आमतौर पर वैशाखी से पहले ही अनाज मंडियों में गेहूं की आमद शुरू हो जाती थी लेकिन पहले फरवरी-मार्च में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों पर सितम ढाया और अब कोरोना वायरस ने उनके हाथ-पैर बांध दिए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी क्रय केन्द्रों पर गेहूं की खरीद एक अप्रैल को शुरू होनी थी, मगर सरकार ने अब इसकी तारीख बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दी है, ऐसे में समस्या यह है कि अब तक जो किसान अपनी फसल किसी तरह काट चुके हैं, वे इसे कहां रखें। टिकैत ने कहा कि यह मुश्किल समय है, हम चाहते हैं कि समय पर किसानों की फसल की खरीद हो। उन्होंने कहा कि सरकार बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दे और वह अगले छह माह का बिजली का बिल भी माफ करे। हालांकि सरकार ने मजदूरों की किल्लत को देखते हुए किसानों से कम्बाइन मशीन के जरिए फसल कटाई करने को कहा है लेकिन इसकी भी अपनी समस्याएं हैं।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी एम सिंह बताते हैं कि कम्बाइन मशीन के जरिए फसल काटना हर जगह के लिए व्यावहारिक नहीं है। उन्होने कहा कि इससे किसानों को अपने जानवरों के लिए भूसा नहीं मिलता, देश में छोटे किसानों की तादाद बहुत ज्यादा है जो फसल काटकर ही साल भर के लिए अपने जानवरों के लिए सूखे चारे (भूसे) की व्यवस्था करते हैं। सिंह ने बताया कि उन्होंने हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस बारे में सुझाव देते हुए कहा था कि छोटे किसान हाथ से फसल की कटाई करते हैं क्योंकि इससे निकलने वाले चारे से वे अपने पशुओं के लिए साल भर का इंतजाम कर लेते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे में किसानों को कम्बाइन हार्वेस्टर से फसल कटवाने के लिए प्रोत्साहन राशि देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कम्बाइन हार्वेस्टर से फसल कटाने वाले किसान को 100 रुपए प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि मिले, भूसे का मोह छुड़ाने के लिए अगले एक साल के लिए दूध पर पांच रुपए प्रति लीटर अतिरिक्त दिया जाए, जिससे किसान चारे की व्यवस्था कर पाए। उन्होंने कहा कि सरकारी गेंहू खरीद के लिए खरीद केंद्रों को खेत या गांव से खरीदने को कहा जाए।

इस बीच, कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार कोरोना संक्रमण के कारण उपजी चुनौतियों और किसानों के हितों के बीच तालमेल बैठाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने फसल को जल्द से जल्द मंडियों में पहुंचाने के उपाय किए हैं, ताकि किसानों के सिर से बोझ हट सके।

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