नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 साल पूरे होने पर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक बयान में खड़गे ने आरोप लगाया कि 12 साल पहले के मुकाबले आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी कम हैं, लेकिन इसके बावजूद देश के भीतर मोदी सरकार अपनी मुनाफाखोरी में व्यस्त है और आम जनता को कोई राहत नहीं दे रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की 27 मई, 2014 की एक आधिकारिक विज्ञप्ति का हवाला देते हुए आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरा और कहा कि ‘हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्या’ यानी सच्चाई सबके सामने पूरी तरह साफ है।
अपने दावों को मजबूत करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष ने आधिकारिक आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि ठीक बारह साल पहले 26 मई 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की सत्ता संभाली थी, उस दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत 108.05 डॉलर प्रति बैरल थी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत 58.59 रुपये के स्तर पर थी। उस समय देश के आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल 71.51 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल 56.71 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा था। इसके विपरीत, वर्तमान समय में कच्चे तेल की वैश्विक कीमत घटकर 99 डॉलर प्रति बैरल से भी कम हो गई है, लेकिन इसके बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़कर क्रमशः 102.12 रुपये और 95.20 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने गणना साझा करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल सस्ता होने के बाद भी देश में पेट्रोल करीब 42.8 प्रतिशत और डीज़ल करीब 67.9 प्रतिशत तक महंगा कर दिया गया है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मूल्य नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया का हर अर्थशास्त्री इस बुनियादी बात को अच्छी तरह जानता है कि पेट्रोल और डीज़ल की महंगाई का सीधा असर अर्थव्यवस्था के हर छोटे-बड़े क्षेत्र पर पड़ता है। परिवहन लागत बढ़ने से लेकर रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं तक, सब कुछ महंगा हो जाता है जिससे अंततः देश के आम आदमी पर ही महंगाई की चौतरफा मार बढ़ती है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार से सवाल किया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल कम दाम में मिल रहा है, तो देश की जनता को इसका सीधा लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है और आम उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय सरकार लगातार अपनी तिजोरी भरने और मुनाफाखोरी करने में क्यों लगी हुई है।
कांग्रेस अध्यक्ष का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है जब देश के तेल उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से जूझना पड़ रहा है। सोमवार को ही तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा इजाफा किया है, जिसमें पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल के दामों में 2.71 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। गौरतलब है कि पिछले दो सप्ताह से भी कम समय के भीतर यह चौथी बार है जब देश में ईंधन की कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी की गई है, जिसने विपक्ष को सरकार की आर्थिक नीतियों और मूल्य नियंत्रण तंत्र पर चौतरफा हमला करने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।





