वाराणसी। पुरातन और आध्यात्मिक नगरी काशी अब आधुनिक तकनीक से लैस होने जा रही है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शहर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेंसर, डिजिटल साइनेज और स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम के जरिए भीड़ प्रबंधन की नई व्यवस्था विकसित की जा रही है। अब काशी की गलियां और सड़कें श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ धाम और ऐतिहासिक गंगा घाटों तक पहुंचने का रास्ता दिखाएंगी।
टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन की ह्यसस्टेनेबल सिटीज चैलेंजह्ण पहल के तहत वाराणसी को चुना गया है। इस परियोजना में दुनिया के कई शहरों के साथ काशी को भी शामिल किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के बाद अब इसका विस्तार किया जा रहा है। चयनित कंपनियां शहर में यातायात, पैदल यात्रियों की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक समाधान विकसित कर रही हैं। काशी में क्राउड मैनेजमेंट के लिए एआई आधारित सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए चार घंटे पहले ही यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि किस स्थान पर कितनी भीड़ बढ़ सकती है।
इससे पुलिस और प्रशासन को समय रहते भीड़ नियंत्रण, रूट डायवर्जन और वैकल्पिक मार्ग तैयार करने में मदद मिलेगी। सिटी डेटा के सीईओ अपूर्व कुमार के अनुसार, सिटीफ्लो बिग डेटा और जेनरेटिव एआई तकनीक के माध्यम से भीड़ और यातायात के पैटर्न का अध्ययन किया जाएगा। वर्तमान में आठ एआई सेंसर लगाए गए हैं, जिन्हें आगे बढ़ाकर 50 से अधिक किया जाएगा। ये सेंसर लगातार भीड़ और ट्रैफिक की स्थिति की जानकारी काशी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तक पहुंचाएंगे। काशी की गलियों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कलर कोडिंग सिस्टम लागू किया जाएगा।
अलग-अलग रंगों की लाइनों के जरिए लोग अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकेंगे। पीली लाइन से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, नीली लाइन से गंगा घाट और लाल लाइन से वापसी मार्ग की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा म्यूरल पेंटिंग और डिजिटल साइनेज के माध्यम से भी रास्तों की जानकारी दी जाएगी। वोजिक एआई के सीईओ अर्जित विश्वास ने बताया कि एआई आधारित एप रियल टाइम डेटा के आधार पर श्रद्धालुओं को भीड़ वाले रास्तों से बचाएगा और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी देगा। एप के माध्यम से आसपास के दर्शनीय स्थलों और स्थानीय दुकानों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना के तहत दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी सुगम आवागमन की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
अस्सी घाट से मणिकर्णिका घाट तक विशेष नेविगेशन सुविधा विकसित करने की योजना है। इसके तहत रैंप, व्हीलचेयर सुविधा, चेंजिंग रूम और शौचालय जैसी सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि वाराणसी नगर निगम और वाराणसी स्मार्ट सिटी की ओर से टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन, चैलेंज वर्क्स और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया के सहयोग से यह पहल शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि चयनित टीमें ग्राउंड जीरो पर भीड़ और पैदल यात्री प्रबंधन के लिए व्यावहारिक समाधान तैयार कर रही हैं। इस परियोजना को दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हाईटेक तकनीक से लैस होने के बाद काशी में श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।





