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व्यंग्य में शामिल करें नये विचार और विषय

अट्टहास के तीन अंकों और काव्यसंग्रह सृष्टि के गीत का विमोचन
वर्तमान समय में व्यंग्य लेखन के नए मानक पर संगोष्ठी

लखनऊ। व्यंग्य के मानक नहीं, उसकी भाषा बदली है। समसामयिकता और करुणा होना जरूरी है। नये विचार और नये विषय व्यंग्य में निरंतर शामिल करते रहना होगा।
ये विचार वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अनूप श्रीवास्तव की स्मृति में माध्यम साहित्यिक संस्थान और अट्टहास हास्य व्यंग्य पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी संस्थान के निराला सभागार में वर्तमान समय में व्यंग्य लेखन के नए मानक विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किये।
अध्यक्षीय वक्तव्य में कवि पत्रकार सुभाष राय ने पिछले डेढ़ दशक मे बदले परिवेश की चर्चा की और कहा कि आज संकट गहराते हैं। विसंगतियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में हमें यह सोचना है कि क्या व्यंग्य और व्यंग्यकार इन परिस्थितियों से निपटने के लिये तैयार है। बहुत और बहुत अच्छा लिखा जा रहा है पर ये भी सोचना है कि लिखने के अलावा और क्या किया जा सकता है। शिल्पा श्रीवास्तव के संयोजन और व्यंग्य कवि मुकुल महान के संचालन में चली संगोष्ठी में माध्यम संस्थान के पूर्व आयोजनों और गतिविधियों से परिचित कराया। व्यंग्य को आलोचक का गुण बताते हुए कहा कि हम आज अधिक असहिष्णु हो गये हैं, ऐसे में व्यंग्य और उभरकर आना चाहिए था, पर ऐसा नहीं हो रहा। पहले वक्ता के रूप में पंकज प्रसून ने परसाई, शरद जोशी का नाम लेते हुए कहा व्यंग्य के मानक हास्य को व्यंग्य में मानवीय बनाना और करुणा पैदा करने जैसे हैं। हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने कहा कि सरलीकरण के नाम पर व्यंग्य की भाषा विषाक्त होती जा रही है। व्यंग्य के प्रतीक आज बदले हैं तो व्यंग्य के मानक भी गिर गये हैं। प्रशासनिक अधिकारी डा.अखिलेश मिश्रा ने उदाहरण रखते हुए बताया कि हास्य और व्यंग्य के बीच एक छोटी सी लकीर है।
नागपुर से आयी आभा सिंह ने व्यंग्य अगर अपने समय की विडम्बनाओं को बोल नहीं पा रहा तो वह कैसा व्यंग्य! जैसे सवाल उठाये। वास्तुविद् व्यंग्यकार केके अस्थाना ने चार मानकों का जिक्र करते हुए कहा कि अब व्यंग्य के विषय बदल गये हैं। व्यंग्य में अगर सरोकार हैं तो उसकी ग्राह्य था बढ़ेगी।
अपनी रचना प्रक्रिया से अवगत कराते हुए कवयित्री कीर्ति काले ने अनूप श्रीवास्तव को बड़े कद का व्यंग्य संयोजक बताया। उन्होंने कहा कि व्यंग्य के स्थायी मानक हैं। करुणा जरूरी है। आज का व्यंग्य भी समय के साथ बदला है। आज व्यंग्यकार सफलता का मानक उसके सोशल मीडिया के फालोअर हुआ करते हैं, पर यह घातक है। इन्द्रजीत कौर ने नये बिम्ब ओर उपमाओं की तलाश जरूरी बताते हुए आज के समय में सोशल मीडिया फ्रेण्डली होना जरूरी बताया। अलंकार रस्तोगी ने बदलते परिवेश का जिक्र करते हुए सामने प्रश्न रखा कि क्या व्यंग्यकार आज की जरूरत की हिसाब से प्रहार कर पा रहे हैं। उन्होंने समुचित मंच उपलब्ध न होने का दुख भी सामने रखा। आरके उपाध्याय ने अपने संस्मरण कहे और कहा कि साहित्यकार या व्यंग्यकार का दायित्व है कि वह निर्बल के पक्ष को रखे। उन्होंने रचनाओं के मूल्यांकन को जरूरी बताया।
इससे पहले ठाकुर प्रसाद सिंह और अनूप श्रीवास्तव के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। आरके उपाध्याय के काव्य संग्रह सृष्टि के गीत और अट्टहास पत्रिका के तीन नये अंकों का विमोचन अतिथि साहित्यकारों ने किया। इस अवसर पर ज्योति शेखर, सुधा शुक्ला, रंजना शेखर, नवीन शुक्ल, सुधांशु माथुर, अनूपमणि त्रिपाठी, डा.सुरेश, माधव, भारती पाठक आदि उपस्थित थे।
वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार अनूप श्रीवास्तव का गत 20 जनवरी को आकस्मिक निधन हो गया था।अनूप श्रीवास्तव ने करीब छह दशक तक पत्रकारिता एवं साहित्य जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। अनूप श्रीवास्तव ने ही करीब 50 वर्ष पूर्व माध्यम साहित्यिक संस्थान की स्थापना की थी। हरिवंशराय बच्चन, डा.शिव मंगल सिंह सुमन, डा.विद्या निवास मिश्र, ठाकुर प्रसाद सिंह, डा.चन्द्रदेव सिंह माध्यम के संस्थापक सदस्य रहे। माध्यम संस्थान द्वारा पिछले 35 वर्षों से अट्टहास सम्मान समारोह के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर अट्टहास शिखर सम्मान और अट्टहास युवा सम्मान प्रदान किया जाता रहा है। इस कड़ी में देश के 60 से अधिक साहित्यकारों को अब तक सम्मानित किया जा चुका है। माध्यम संस्थान द्वारा एकमात्र हास्य व्यंग्य पत्रिका अट्टहास हास्य व्यंग्य’ का भी मई सन् दो हजार से प्रकाशन किया जा रहा है।

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