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जुलाई में पड़ेंगे गुप्त नवरात्रि , हरिशयनी एकादशी जैसे व्रत और त्योहार

लखनऊ। जुलाई के महीने में एक साथ कई व्रत त्योहार आने वाले हैं। पंचांग की गणना के अनुसार, जुलाई के महीने में ही चातुर्मास का आरंभ होने वाला है। साथ ही इस महीने में देवशयनी एकादशी और जगन्नाथ रथयात्रा जैसी कई व्रत त्योहार मनाए जाएंगे। बता दें कि इस महीने चातुर्मास का आरंभ होने के साथ ही मांगलिक कार्य करीब 4 महीने के लिए बंद हो जाएंगे। इस महीने में जप तप और धार्मिक कार्य करने से पुण्य मिलता है। यहां देखें जुलाई के महीने में व्रत त्योहार की पूरी लिस्ट।

योगिनी एकादशी व्रत महत्व
योगिनी एकादशी का व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिती है। साथ ही असीम पुण्य की प्राप्ति होती है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की गुप्त पूजा अर्चना की जाती है। इस नवरात्रि के एक प्रमुख नियम यह है कि इस दौरान व्रत और पूजा पाठ बहुत ही गुप्त तरीके से किए जाते हैं।

श्रीजगन्नाथ रथयात्रा पुरी
श्रीजगन्नाथ रथयात्रा ओडिशा के पुरी में आयोजित की जाती है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को आयोजित की जाती है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को रथ में विराजमान किया जाता है और उन्हें मंदिर ले जाया जाता है। यह रथ बहुत ही भव्य होते हैं।

हरिशयनी एकादशी व्रत महत्व
हरिशयनी एकादशी के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने के बाद जागते हैं इसलिए इसे चतुर्मास भी कहा जाता है।

चतुर्मास का आरंभ
जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं तो उस दिन से चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। हरिशयनी एकादशी से ही चातुर्मास का आरंभ हो जाता है।

गुरु पूर्णिमा महत्व
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इसे गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। उन्हें सनातन धर्म का परम गुरु माना जाता है। वहीं, बौद्ध धर्म के अनुसार, इस दिन महात्मा बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था।

कोकिला व्रत का महत्व
आषाढ़ मास की पूर्णिमा से कोकिला व्रत का आरंभ हो जाता है और यह व्रत एक महीने तक चलता है। यह व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं। इसमें देवी पार्वती के कोयल (कोकिला) रूप और भगवान शिव की पूजा की जाती है।

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