नई दिल्ली। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने पांच करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले छोटे करदाताओं को राहत देते हुए फरवरी, मार्च और अप्रैल के रिटर्न दाखिल करने में देरी पर लगने वाले ब्याज को शुक्रवार को आधा कर दिया। अब इसकी दर नौ प्रतिशत रहेगी। हालांकि यह लाभ सिर्फ तभी मिलेगा, जब सितंबर 2020 तक रिटर्न दाखिल कर दिए जाएंगे।
इसके अलावा जीएसटी परिषद ने मई, जून और जुलाई के लिए रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा को भी सितंबर तक बढ़ा दिया। इसके लिए कोई ब्याज या विलंब शुल्क नहीं लगेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए शुक्रवार को ये जानकारियां दी। लॉकडाउन के दो महीने के दौरान राजस्व के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा, राज्यों को पता है कि राजस्व संग्रह कैसा रहा है। यह महज 45 प्रतिशत के दायरे में है। वित्त सचिव अजय भूषण पांडेय ने कहा, सभी राज्य इस बात से अच्छी तरह से अवगत हैं कि उन्हें हर महीने कितनी राशि मिल रही है।
उन्होंने कहा, यह सवाल नहीं है कि हम उन्हें इस बारे में बता रहे हैं। केंद्र और सभी राज्य साथ मिलकर इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि हमें हर महीने कितना राजस्व मिल रहा है। राजस्व के ये आंकड़े अंतिम नहीं हैं। पांडेय के पास राजस्व सचिव का भी पदभार है। उन्होंने कहा, चूंकि रिटर्न दाखिल करने का समय बढ़ा दिया गया है, इस कारण हमें अप्रैल, मई और जून के राजस्व की वास्तविक राशि के बारे में बाद में पता चलेगा। यह सिर्फ तभी पता चल सकेगा, जब अंतिम दिन गुजर जाएगा।
जीएसटी संग्रह कम रहने के कारण केंद्र सरकार ने अप्रैल और मई के राजस्व संग्रह के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। पारंपरिक तौर पर किसी महीने के राजस्व संग्रह के आंकड़े अगले महीने की पहली तारीख को जारी कर दिए जाते हैं। सरकार ने मार्च में तीन महीने (मार्च, अप्रैल और मई) के लिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करने का समय जून के अंत तक बढ़ा दिया था। यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) को राहत देने के लिए किया गया था। इसके तहत रिटर्न दाखिल करने में जून अंत तक की देरी पर पांच करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले निकायों को किसी प्रकार का विलंब शुल्क, जुर्माना या ब्याज नहीं देना होगा।
सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि पांच करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले छोटे करदाताओं के लिए फरवरी, मार्च और अप्रैल के रिटर्न दाखिल करने में देरी पर लगने वाले ब्याज को आधा कर दिया गया है। अब इसकी दर नौ प्रतिशत रहेगी। हालांकि यह लाभ सिर्फ तभी मिलेगा, जब सितंबर 2020 तक रिटर्न दाखिल कर दिए जाएंगे। इसके अलावा मई, जून और जुलाई के लिए रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा को भी सितंबर तक बढ़ा दिया गया है। इसके लिए कोई ब्याज या विलंब शुल्क नहीं लगेगा।





