नई दिल्ली। भारत के ग्रीन ट्रांजिशन को गति देने में बड़े स्तर के सोलर पार्क्स अहम भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए मजबूत पावर इवैक्युएशन इंफ्रास्ट्रक्चर और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। यह बात उद्योग विशेषज्ञों ने कही।
इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के डायरेक्टर जनरल संजय गंजू ने कहा कि भारत को ऐसी तकनीकों में निवेश करना होगा, जिससे सौर ऊर्जा उत्पादन की अवधि बढ़ाई जा सके। साथ ही उन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों को दूर करना होगा, जहां नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाएं अधिक हैं।
उन्होंने लद्दाख जैसे दूरस्थ इलाकों का उदाहरण देते हुए कहा, हमें ऐसा मैकेनिज्म बनाना होगा जिससे वहां उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुंचाया जा सके। साथ ही ऐसी तकनीकों में निवेश जरूरी है, जिससे लंबे समय तक सौर ऊर्जा का उपयोग किया जा सके।
गंजू ने कहा कि खावड़ा सोलर पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स यह दिखाते हैं कि अनुपयोगी या बंजर जमीन का भी ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। वह जमीन लगभग रेगिस्तान जैसी थी, जिसका कोई उपयोग नहीं था, लेकिन अब वहीं से बिजली पैदा कर देश में इस्तेमाल की जा रही है, उन्होंने कहा।
घरेलू उत्पादन बढ़ाना जरूरी
उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करने पर भी जोर दिया। गंजू ने कहा, वेफर्स और बैटरियों का उत्पादन देश में ही होना चाहिए, तभी हम आत्मनिर्भर बन पाएंगे।इसके लिए रिसर्च और लोकल मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के डायरेक्टर जनरल मोहम्मद रिहान ने कहा कि बड़े सोलर पार्क्स ने सौर ऊर्जा को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन प्रोजेक्ट्स ने नीति समर्थन, उद्योग भागीदारी और बड़े स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ लाकर लागत कम करने और इंडस्ट्री को मजबूत करने में मदद की है, उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि देश में सोलर इंस्टॉलेशन करीब 165 गीगावॉट तक पहुंच चुका है। वहीं मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 213 गीगावॉट और सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 30 गीगावॉट से अधिक हो गई है। रिहान ने कहा कि भारत अपने दीर्घकालिक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क, नई तकनीकों के विकास और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता को और मजबूत करना होगा। सोलर पार्क्स आने वाले समय में ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।





