विशेष रूप से सजाए गए स्टॉल शहरवासियों के आकर्षण का केंद्र बने
लखनऊ। प्रख्यात बनारस घराने के शास्त्रीय गायक एवं पद्म पुरस्कार से सम्मानित पंडित साजन मिश्र के सुमधुर गायन और पद्मश्री से सम्मानित कलाकारों की कजरी गायकी की माटी की सुगंध से आर्ट आॅफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर संस्कृति, संगीत, आध्यात्मिकता और परंपरा के अनूठे रंगों में सराबोर हो उठा। यह अवसर था अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित प्रथम ‘यूपी महोत्सव’ के भव्य उद्घाटन का। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त सहयोग से आयोजित यह महोत्सव संगीत, विरासत, पर्यटन और पारंपरिक उद्योगों को एक अत्यंत जीवंत और गतिशील मंच पर एक साथ ला रहा है। महोत्सव में उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाने वाले प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायक पंडित साजन मिश्र ने सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच प्रदान करने के लिए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के दूरदर्शी दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा, गुरुदेव का दृष्टिकोण सदैव अत्यंत व्यापक और विराट होता है। वे किसी भी कार्य को इतने भव्य स्तर पर क्रियान्वित करते हैं कि संपूर्ण विश्व उसे अत्यंत सम्मान के साथ देखता है। महोत्सव के द्वितीय दिवस पर पंडित साजन मिश्र की स्मरणीय प्रस्तुति ने श्रोताओं को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के अगाध सागर की सैर कराई। वाराणसी की आध्यात्मिक और संगीतमय विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की कालजयी समृद्धि में पूरी तरह सराबोर कर दिया। ‘आर्ट आॅफ लिविंग’ की स्थापना के गौरवमयी 45 वर्ष में प्रवेश के पावन अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने कहा, “इतने लंबे समय तक किसी संस्था का स्तर निरंतर उत्कृष्ट से उत्कृष्टतर होते जाना वास्तव में गुरुदेव का चमत्कार है। उनसे जुड़े लोग पूर्ण समर्पण भाव के साथ उनके प्रति समर्पित हैं। इसी अटूट जुड़ाव का प्रतिफल है कि आज हम सफलता के 45वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। आगामी समय में यह यात्रा 50 वर्ष की होगी और तत्पश्चात अनंत काल तक अनवरत चलती रहेगी। इससे पूर्व, प्रात: काल केंद्र में आयोजित विशेष देवी पूजा के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के ट्रस्टी श्री के. वेंकट रमन घनपाठी ने गुरुदेव का अभिनंदन एवं सम्मान किया। यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की लोक विरासत के एक आत्मिक उत्सव के रूप में प्रस्तुत हुआ। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती उर्मिला श्रीवास्तव की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति से मंच जीवंत हो उठा, जिन्होंने गुरुदेव की दिव्य उपस्थिति में भावभीनी संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की। ‘गुरु वंदना’ और ‘देवी वंदना’ की भक्तिपूर्ण गहराई से लेकर ‘कजरी गायन’ के पारंपरिक लोक सौंदर्य तक, उनकी प्रस्तुति ने एक ऐसा वातावरण निर्मित किया जो ध्यानमयी और जादुई था। भक्ति, अतीत की स्मृतियों और सांस्कृतिक गौरव से सराबोर इस संगीतमय महफिल ने उत्तर प्रदेश के लोक जीवन के स्पंदन को पूरी भव्यता से प्रतिबिंबित किया और विभिन्न पीढ़ियों के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों का उत्साहवर्धन करने तथा महोत्सव के सांस्कृतिक उत्सव को मनाने के लिए ‘आर्ट आॅफ लिविंग’ के उत्तर प्रदेश चैप्टर के सदस्य भारी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को निरंतर बढ़ावा देने के भगीरथ प्रयासों के लिए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर को सम्मानित भी किया। 22 मई से प्रारंभ होकर 23 और 24 मई तक चलने वाले इस त्रिदिवसीय महोत्सव में आगंतुकों को उत्तर प्रदेश के अनूठे स्वादों, परिधानों और उत्कृष्ट शिल्प कौशल का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होगा। आर्ट आॅफ लिविंग के महिला अधिकारिता एवं बाल कल्याण कार्यक्रमों की अध्यक्षा श्रीमती भानुमति नरसिम्हन ने उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) और ‘एक जिला एक व्यंजन’ (ओडॉक) के अंतर्गत विशेष रूप से तैयार किए गए स्टालों का उद्घाटन किया। इन स्टालों पर उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के विशिष्ट उत्पादों और शिल्पकारों की अद्वितीय कारीगरी को प्रदर्शित किया गया है। हस्तशिल्प के उत्कृष्ट खजानों और स्वदेशी वस्त्रों से लेकर क्षेत्रीय व्यंजनों और सांस्कृतिक स्मृतियों तक, यह प्रदर्शनी क्षेत्र हर आयु वर्ग के आगंतुकों के लिए एक अत्यंत रंगीन, जीवंत और दृश्यात्मक रूप से आकर्षक अनुभव प्रदान कर रही है। महोत्सव को और अधिक वैचारिक गहराई प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने एक विशेष दीर्घा का निर्माण किया है, जिसके माध्यम से आगंतुक अयोध्या, वाराणसी, मथुरा और प्रयागराज जैसे पावन स्थलों के पवित्र आभामंडल और सांस्कृतिक महत्व का अनुभव कर सकते हैं। ये वे नगर हैं जो सदियों से भारत की आध्यात्मिक चेतना को आकार दे रहे हैं। गुरुदेव के दूरदर्शी मार्गदर्शन से अभिसिंचित यह महोत्सव उत्तर प्रदेश की शाश्वत आध्यात्मिक विरासत, कलात्मक प्रतिभा, पर्यटन की असीम संभावनाओं और स्थानीय कुटीर उद्योगों का एक ऐसा महाउत्सव है, जिसे इस प्रकार संयोजित किया गया है कि हमारी प्राचीन परंपराएं आज की युवा पीढ़ी के साथ भी अत्यंत प्रभावी ढंग से संवाद स्थापित कर सकें।





