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ओटीटी पर नये कलाकारों को मौका मिलता है : दीपक दत्ता

लखनऊ। करीब तीन दशक से फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री में सक्रिय अभिनेता दीपक दत्ता ने अपने अभिनय से कई यादगार किरदार दर्शकों को दिए हैं। हाल ही में रिलीज हुई पारिवारिक फिल्म ‘दादी की शादी’ में उनके काम को सराहा जा रहा है , इसके अलावा ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में दिलीप वेंगसरकर का किरदार निभाकर भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। इस खास बातचीत में दीपक दत्ता ने अपनी नई फिल्म, ओटीटी, टेलीविजन में आए बदलाव, फिल्म ‘रामायण’ को लेकर अपनी राय, करियर के संघर्ष और नए कलाकारों के लिए अपनी सीख पर खुलकर बात की।

आपकी हालिया फिल्म ‘दादी की शादी’ को दर्शकों का अच्छा प्यार मिल रहा है. इस फिल्म के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
मुझे सबसे अच्छी बात यह लगी कि काफी समय बाद ऐसी फिल्म आई जिसे पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सकता है. दादा-दादी, माता-पिता, बच्चे, सभी इस फिल्म को एंजॉय कर सकते हैं. आज के समय में ऐसी फैमिली फिल्में कम बनती हैं।

इस फिल्म में आपने कपिल शर्मा के साथ काम किया. उनका अनुभव कैसा रहा?
मैं पहले भी कह चुका हूं और आज भी कहूंगा कि कपिल शर्मा में सिर्फ कॉमेडियन नहीं, बल्कि एक शानदार अभिनेता भी छिपा है. इस फिल्म में उन्होंने किसी स्टैंडअप कॉमेडियन की तरह नहीं बल्कि एक किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है. मुझे लगता है कि उन्हें आगे भी अलग-अलग तरह की फिल्में करनी चाहिए।

आपके करियर की शुरूआत कैसे हुई?
मैंने 1995 में काम शुरू किया था. शुरूआत फिल्मों से हुई, फिर टीवी की ओर आया. उस समय वीकली शोज होते थे, इसलिए हम एक साथ तीन-चार शो करते थे. बाद में सोनी टीवी और जी टीवी पर भी काम किया. मेरा सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन मुझे खुशी है कि आज भी बतौर अभिनेता लगातार काम कर रहा हूं।

फिल्म ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में आपने दिलीप वेंगसरकर का किरदार निभाया. यह अनुभव कैसा था?
मैं बचपन से दिलीप वेंगसरकर का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा हूं. जब मुझे पता चला कि मैं उनका किरदार निभाने वाला हूं, तो बेहद खुश हुआ. निर्देशक नीरज पांडे को मेरा आॅडिशन पसंद आया और मुझे यह मौका मिला. मेरे लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था।

आपने ओटीटी पर भी काम किया है. इस प्लेटफॉर्म को कैसे देखते हैं?
मैंने अभी दो ओटीटी प्रोजेक्ट किए हैं. ‘डॉ. अरोड़ा’ और ‘क्रैश कोर्स’ का अनुभव बहुत अच्छा रहा. ओटीटी पर शानदार कहानियां बन रही हैं और कलाकारों को खुद को साबित करने का बेहतर मौका मिलता है. मैं आगे भी इस प्लेटफॉर्म पर ज्यादा काम करना चाहता हूं।

क्या आपको लगता है कि आज भी कलाकारों को उनके लुक के आधार पर जज किया जाता है?
पहले यह सोच थी कि अच्छा दिखने वाला हीरो बनेगा और अलग दिखने वाला विलेन. लेकिन अब समय बदल रहा है. एक अभिनेता के तौर पर मेरा मानना है कि कलाकार किसी भी तरह का किरदार निभा सकता है. ओटीटी और नई फिल्मों ने इस सोच को काफी हद तक बदला है।

आपने टेलीविजन का लंबा सफर देखा है. आज के टीवी इंडस्ट्री में आए बदलावों को आप कैसे देखते हैं?
जब हमने शुरूआत की थी, तब वीकली शोज का दौर था और हम एक साथ तीन-चार शोज में काम कर लेते थे. उसके बाद डेली सोप्स आए और टेलीविजन इंडस्ट्री तेजी से बढ़ी. बालाजी के एक के बाद एक हिट शोज आए और टीवी का सुनहरा दौर देखने को मिला. लेकिन अब समय बदल गया है. ओटीटी के आने से दर्शकों के पास कई विकल्प हैं, जिससे टीवी को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है. आज बजट पहले से कम हो गए हैं, काम का दबाव बढ़ गया है और कई शोज तीन-चार महीने में ही बंद हो जाते हैं. इंडस्ट्री में अनिश्चितता जरूर बढ़ी है, लेकिन मेरा मानना है कि टेलीविजन हमेशा अपनी जगह बनाए रखेगा. समय के साथ इसके पैरामीटर्स बदले हैं, लेकिन दर्शक आज भी टीवी देखते हैं और आगे भी देखते रहेंगे।

हाल ही में फिल्म ‘रामायण’ का ट्रेलर रिलीज हुआ, जिस पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं और विवाद देखने को मिले. आप इसे कैसे देखते हैं?
आज सोशल मीडिया का दौर है, इसलिए किसी भी फिल्म का टीजर या ट्रेलर आते ही लोग अपनी-अपनी राय देने लगते हैं. कुछ लोग तारीफ करते हैं तो कुछ आलोचना. मुझे व्यक्तिगत तौर पर ‘रामायण’ का ट्रेलर काफी पसंद आया. रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में अच्छे लग रहे हैं. यश और सनी देओल भी अपने-अपने किरदारों में प्रभावशाली नजर आए हैं. मेरी सबसे बड़ी अपील यही है कि इस फिल्म की तुलना रामानन्द सागर के टीवी सीरियल से न करें. वह एक अलग दौर का बेहतरीन सीरियल था, जबकि यह एक फिल्म है. इसे एक फिल्म के रूप में देखिए. इतने बड़े बजट और मेहनत से इसे बनाया गया है. मुझे भरोसा है कि निर्देशक नितेश तिवारी ने इसे पूरी ईमानदारी से बनाया होगा. ट्रेलर देखकर फैसला करने के बजाय पूरी फिल्म का इंतजार करना चाहिए।

अगर आपको ‘रामायण’ में कोई किरदार निभाने का मौका मिले, तो आप किस भूमिका को चुनना चाहेंगे?
एक अभिनेता के तौर पर मुझे रावण का किरदार निभाना बेहद दिलचस्प लगेगा. उसके व्यक्तित्व में कई परतें हैं. वह विद्वान है, भगवान शिव का परम भक्त है, एक शक्तिशाली राजा भी है और उसके भीतर कई तरह के भाव हैं. ऐसे किरदार में एक अभिनेता के लिए बहुत कुछ एक्सप्लोर करने का मौका होता है. मुझे लगता है कि हर अभिनेता कभी न कभी ‘रामायण’ (का हिस्सा बनना जरूर चाहेगा।

आपने कई जॉनर में काम किया है. सबसे कठिन क्या लगता है?
मेरे हिसाब से कॉमेडी सबसे मुश्किल होती है. किसी को रुलाना आसान है, लेकिन किसी को दिल से हंसाना बहुत कठिन है. कॉमेडी पूरी तरह टाइमिंग का खेल है. अगर टाइमिंग थोड़ी भी इधर-उधर हुई तो पूरा सीन खराब हो सकता है।

जब कोई फिल्म या शो उम्मीद के मुताबिक नहीं चलता तो आप खुद को कैसे संभालते हैं?
दुख तो होता है और होना भी चाहिए. अगर आप किसी काम में पूरी मेहनत लगाते हैं तो उसके न चलने का अफसोस स्वाभाविक है. लेकिन उस दुख में हमेशा नहीं रह सकते. जैसे ही अगला काम शुरू होता है, आप फिर उसी ऊर्जा और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ जाते हैं।

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