ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का खाता पैरा पावरलिफ्टिंग से खुला है। बिहार के झंडू कुमार ने पुरुषों के हैवीवेट वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ ही भारत ने मेडल टैली में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी।दो ग्रुप में हुए मुकाबले में झंडू कुमार ने 130.9 का बेहतरीन स्कोर बनाकर ग्रुप बी में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने युगांडा के डेनिस म्बाजीरा (114.1) और ऑस्ट्रेलिया के बेन राइट (110.9) को पीछे छोड़ते हुए फाइनल रेस में जगह बनाई। कंबाइंड स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 132.8 की लिफ्ट के साथ गोल्ड जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग 131.0 के साथ सिल्वर पर रहे। झंडू की 130.9 लिफ्ट उन्हें ब्रॉन्ज दिलाने के लिए काफी साबित हुई। खास बात यह रही कि वे सिल्वर से सिर्फ 0.1 अंक से चूक गए।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
1 जनवरी 1997 को बिहार के नालंदा जिले के हरनौत में जन्मे झंडू कुमार बचपन से ही पोलियो से पीड़ित रहे हैं। बेहद साधारण परिवार से आने वाले झंडू के पिता सब्जी बेचते हैं। आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2017 में उन्होंने पैरा-एथलेटिक्स से करियर की शुरुआत की और शॉट पुट व डिस्कस थ्रो में कई पदक जीते। जिम में ट्रेनिंग के दौरान उनकी रुचि पावरलिफ्टिंग में बढ़ी और बाद में उन्होंने इसी खेल को अपना मुख्य लक्ष्य बना लिया।
अशोक मलिक मेडल से चूके
दिन के दूसरे मुकाबले में भारत के अशोक मलिक पुरुषों के लाइटवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में मेडल से मामूली अंतर से चूक गए। उन्होंने 200 किलोग्राम की शानदार लिफ्ट के बावजूद 143.8 अंक के साथ चौथा स्थान हासिल किया। मलेशिया के बॉनी बुन्याऊ गुस्टिन ने 153.5 अंक के साथ ब्रॉन्ज जीता।इस इवेंट में इंग्लैंड के मार्क स्वान ने 222 किलोग्राम की टॉप लिफ्ट के साथ 153.9 अंक लेकर गोल्ड अपने नाम किया। वहीं नाइजीरिया के रोलैंड एज़ुरुइक समान अंक होने के बावजूद काउंटबैक नियम के चलते सिल्वर पर रहे।
अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन
भारत के परमजीत कुमार 135.6 अंक के साथ सातवें स्थान पर रहे। स्कॉटलैंड के फिनले डेविडसन पांचवें, जबकि नाइजीरिया के इब्राहिम दाउदा छठे स्थान पर रहे। झंडू कुमार का यह मेडल न सिर्फ भारत के लिए खास है, बल्कि उनके संघर्ष और मेहनत की प्रेरणादायक कहानी भी बयां करता है।





