नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच एक अहम खबर सामने आई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दिपके बीमार पड़ गए हैं। उन्हें टाइफाइड हो गया है। खुद दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर अपनी बीमारी की जानकारी दी।
वीडियो संदेश में दिपके ने बताया कि मेडिकल जांच में टाइफाइड की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि वह शारीरिक रूप से कमजोर जरूर महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनका संकल्प पहले की तरह मजबूत है। दिपके ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
गौरतलब है कि अभिजीत दिपके जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में अनशन पर भी बैठे थे। हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आग्रह पर उन्होंने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त कर दिया था। वांगचुक ने खुद भी 26 दिन का अपना हंगर स्ट्राइक गुरुवार को खत्म किया। उनकी पत्नी और शिक्षाविद् गीतांजलि आंगमो ने मंच से बताया था कि वांगचुक ने दिपके से अपील की थी कि वह अपनी ऊर्जा बचाकर आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
इधर, NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी का धरना लगातार जारी है। यह आंदोलन अब 36वें दिन में प्रवेश कर चुका है और प्रदर्शनकारियों की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और जल्द ही सरकार का रुख स्पष्ट करने का आश्वासन दिया।
सीजेपी ने अपनी तीन प्रमुख मांगों को दोहराया है। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, NEET-UG से प्रभावित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा और आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई न करने की मांग शामिल है। संगठन का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
इससे पहले ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद आंदोलन और तेज हो गया था। अब अभिजीत दिपके की बीमारी के बावजूद प्रदर्शनकारियों का हौसला बना हुआ है और वे सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।





