लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार और कांग्रेस के बीच प्रवासियों के लिए बस व्यवस्था को लेकर चल रही तनातनी के बीच अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाने वाली रायबरेली की सदर सीट से विधायक अदिति सिंह को बुधवार को निलंबित कर दिया गया है। उनको नोटिस दे कर जवाब भी मांगा गया है।
कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने बताया कि विधायक अदिति सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी की महिला विंग के महासचिव पद से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। निलंबन के साथ-साथ उनको नोटिस जारी करके 24 घंटे में जवाब मांगा गया है। बताते चलें की पिछले 6 महीनों में यह दूसरी बार है, जब सिंह को पार्टी की लीग से हटकर काम करने के आरोप में नोटिस दिया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के सदर सीट से विधायक सिंह ने कांग्रेस के प्रवासी कामगारों की मदद करने के लिए बसों का बेड़ा लगाने के मामले में कांग्रेस पर उंगली उठाई थी। बुधवार को अदिति सिंह ने ट्वीट किया था, ‘आपदा के वक्त ऐसी निम्न सियासत की क्या जरूरत,एक हजार बसों की सूची भेजी, उसमें भी आधी से ज्यादा बसों का फर्जीवाड़ा, 297 कबाड़ बसें, 98 आटो रिक्शा व एबुंलेंस जैसी गाड़ियां, 68 वाहन बिना कागजात के, ये कैसा क्रूर मजाक है, अगर बसें थीं तो राजस्थान,पंजाब, महाराष्ट्र में क्यूं नहीं लगाई।
विधायक ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘कोटा में जब यूपी के हजारों बच्चे फंसे थे तब कहां थीं ये तथाकथित बसें, तब कांग्रेस सरकार इन बच्चों को घर तक तो छोड़िए, बार्डर तक ना छोड़ पाई, तब श्री योगी आदित्यनाथ जी ने रातों रात बसें लगाकर इन बच्चों को घर पहुंचाया, खुद राजस्थान के सीएम ने भी इसकी तारीफ की थी।’ वैसे यह पहली बार नहीं है जब अदिति सिंह ने पार्टी विरोधी रुख अपनाया है।
पिछले साल पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुये अदिति ने महात्मा गांधी की जयंती पर विधानसभा के विशेष सत्र में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्हेंं पार्टी की तरफ से कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। सिर्फ यही नहीं पार्टी ने उनकी सदस्यता खत्म करने की विधानसभा अध्यक्ष से सिफारिश भी की थी। इसके पहले भी कश्मीर से धारा 370 हटाने के मसले पर भी उन्होंने कांग्रेस से अलग अपना पक्ष रखा था। कोरोना वॉरियर्स के लिए पीएम मोदी की अपील पर भी उन्होंने दीये जलाये थे।





