अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में नाटक का मंचन
लखनऊ। आकांक्षा थियेटर आर्टस लखनऊ द्वारा नाट्य महोत्सव के द्वितीय संध्या में श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति लखनऊ द्वारा 60 दिवसीय कार्यशाला के अन्तर्गत तैयार की गयी नाट्यकृति द सेडक्शन जिसके लेखक एन्टोन चेखव नाट्य रचना जिसका निर्देशन नगर के सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक तुषार बाजपेई शुभम के निर्देशन में अन्तर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में मंचित किया गया। नाटक के कथानक के अनुसार द सेडक्शन एंटोन चेखव का एक हास्यप्रद एकांकी नाटक / लघु कथा है, जो एक अहंकारी व्यक्ति पर केंद्रित है, जो अन्य पुरुषों की पत्नियों को बहकाने में माहिर होने का दावा करता है। कथानक अक्सर उसकी बहकाने की विधियों को उजागर करता है, जिसमें एक विवाहित महिला और उसके बेखबर पति के बीच की चुनौती पर ध्यान केंद्रित किया गया है। कथानक यह कहानी एक आकर्षक कुंवारे व्यक्ति के शिक्षणात्मक तरीकों की पड़ताल करती है, जब वह एक महिला, लुभाने का प्रयास करता है, जो एक धनी, भोले-भाले व्यक्ति से विवाहित है। रूपांतरण इस कहानी को अक्सर थिएटर कंपनियां हंसी-मजाक या कमेडी में रूपांतरित करती हैं, जो अक्सर गलतफहमी और चंचल छल पर केंद्रित होती है। विषयवस्तु एक हास्य रचना के रूप में, यह चेखव के मानवीय संबंधों, अनजाने में होने वाली इच्छा और सामाजिक व्यंग्य पर केंद्रित दृष्टिकोण को उजागर करती है। इसे अक्सर अन्य लघु हास्य नाटकों या दृश्यों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नाटक में प्रधान भूमिा पीटर सिम्योनिच की भूमिका में नाट्य निर्देशक तुषार बाजपेई शुभम तथा निकोलाईच की भूमिका में अहमद रजा खान तथा आइरिना की भूमिका में मिन्नी दीक्षित ने अपने दमदार अभिनय से रंग दर्शकों को लोट-पोट कर दिया। सेट डिजाइनिंग नदीम अंसारी एवं अजगर अली का ही था, जो कि नाटक के अनुरूप था। सेट निर्माण में अजगर बेग, सुब्रोतो बोस एंव फैजान बेग का था आकर्षक मंच व्यवस्था अनुपम बिसारिया का था 60 दिवसीय कार्यशाला का कुशल संचालन नगर के वरिष्ठतम रंग निर्देशक प्रभात कुमार बोस, उ०प्र० संगीत नाटक अकादमी अवार्डी के कुशल संचालन में संचालित किया गया रूप सज्जा शहीर एवं अंशिका क्रियेशन द्वारा पात्रों का मुख सज्जा नाटक के अनुरूप किया था वस्त्र विन्याश सुनीता यादव का था प्रकाश परिकल्पना की कमान देवाशीष मिश्रा ने संभाली थी नाटक संगीत निर्देशन व संचालन श्रद्धा बोस का था जो कि अत्यधिक प्रभावी रहा सम्पूर्ण परिकल्पना एवं निर्देशन तुषार बाजपेई शुभम का था यह नाटक दर्शकों को हास्य के दृश्यों में हसाने के प्रयास को सफल कहा जा सकता है।





