लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य कर विभाग को निर्देश दिए हैं कि कर संग्रह बढ़ाने के साथ-साथ ईमानदार व्यापारियों को सुविधा, सम्मान और त्वरित समाधान उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में राज्य कर विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और विभाग को राजस्व वृद्धि के साथ विश्वास आधारित प्रशासन का मॉडल प्रस्तुत करना होगा। सोमवार को राज्य कर विभाग के शासन, मुख्यालय और फील्ड स्तरीय अधिकारियों के साथ आयोजित विशेष बैठक में मुख्यमंत्री ने कर प्रणाली को अधिक सरल, डिजिटल और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, अपील निस्तारण और रिफंड जैसी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी पूरी तरह समाप्त की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को व्यापारियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने, छोटे कारोबारियों को जागरूक करने तथा जिला और खंड स्तर तक करदाता सहायता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से कर चोरी पर रोक लगाने के साथ-साथ वैध व्यापार को प्रोत्साहन देना भी जरूरी है।बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य ने जीएसटी और वैट मद में कुल।,15,977 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया, जो पुनरीक्षित अनुमान का लगभग 98.8 प्रतिशत है। जीएसटी संग्रह के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र पहले और कर्नाटक तीसरे स्थान पर रहा।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि सभी 75 जनपदों में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग और जीएसटी 2.0 सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई। व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने का प्रशिक्षण भी दिया गया तथा सभी जिलों में व्यापार बंधु की बैठकें आयोजित की गर्इं। बैठक में यह भी बताया गया कि जून 2026 से राज्य कर विभाग खंड स्तर पर संवाद कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा विभिन्न बिजनेस सेक्टरों, व्यापारी संगठनों और अधिवक्ता संघों के साथ संवाद स्थापित किया गया है। सीजीएसटी, डीजीजीआई, रेलवे सहित अन्य विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए र्साफा कारोबारियों के साथ राज्य और जिला स्तर पर विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।





