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उप्र सरकार का न्यायालय में दावा- पुलिस ने आत्मरक्षा में चलाई गोली

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में दायर हलफनामे में कहा है कि गैंगस्टर विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर ला रही पुलिस की टुकड़ी को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी क्योंकि आरोपी ने भागने का प्रयास किया जिसमें वह मारा गया।

राज्य सरकार ने इस हलफनामे में कहा है कि उसने उप्र के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में 11 जुलाई को तीन सदस्ईय विशेष जांच दल गठित किया है जो इस खतरनाक गैंगस्टर द्वारा किए गए अपराधों और दुबे, पुलिस तथा नेताओं की कथित सांठगांठ के मामलों की जांच करेगा।

विकास दुबे 10 जुलाई को कानपुर के निकट भौती में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उप्र पुलिस के महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी के हलफनामे के अनुसार, परिस्थितियों के तहत पुलिस की सुरक्षा टुकड़ी के पास यही विकलप उपलब्ध था कि वह आत्मरक्षा में जवाबी गोली चलाए। राज्य सरकार ने मुठभेड़ में विकास दुबे के मारे जाने की घटना की न्यायालय की निगरानी में सीबीआई या एनआईए से जांच कराने के लिए दायर याचिका में यह हलफनामा दाखिल किया है।

पुलिस महानिदेशक ने इस बात से इंकार किया कि दुबे ने उज्जैन में समर्पण किया था। उन्होंने कहा कि पुलिस से बचने के लिए भाग रहे इस आरोपी को महाकाल मंदिर में समिति के प्राधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने मंदिर परिसर में पहचान लिया था। दुबे को हथकड़ी नहीं लगाए जाने के बारे में पुलिस महानिदेशक ने हलफनामे में कहा, आरोपी को सीधे कानपुर की अदालत में पेश करने के लिए उसके साथ तीन वाहनों में 15 पुलिसकर्मी थे।

उसे 24 घंटे के भीतर कानपुर की अदालत में पेश करना था जिसकी समय सीमा 10 जुलाई को सवेरे 10 बजे खत्म हो रही थी। हलफनामे के अनुसार, इन तथ्यों का विस्तार से विवरण देने का मकसद इस न्यायाल को संतुष्ट कराना है कि विकास दुबे की पुलिस की हिरासत से बच निकलने की मंशा ही नहीं थी (जैसा कि उसने 10 जुलाई को प्रयास किया) बल्कि उसकी ऐसा करने की क्षमता भी थी। उसे पुलिसकर्मियों पर हमला कर उनकी हत्या करने का भी अनुभव था। 10 जुलाई को उसने भागने का प्रयास किया और जब पुलिस ने उसे रोका तो उसने पुलिस पर फायरिंग की।

शीर्ष अदालत ने 14 जुलाई को कहा था कि वह विकास दुबे और उसके सहयोगियों की मुठभेड़ में मौत और कानपुर में आठ पुलिसकर्मियो की हत्या की घटनाओं की जांच के लिए तेलगांना मामले की तरह ही पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने पर विचार कर सकती है।

तेलंगाना में एक पशु चिकित्सक से सामूहिक बलात्कार के बाद उसकी हत्या के चार आरोपियों की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले में भी शीर्ष अदालत ने इसी तरह की समिति गठित की थी। हलफनामे में कहा गया है, सरकार ने विशेष जांच दल को निर्देश दिया है कि वह घटनास्थल और दूसरे संबंधिति स्थानों का दौरा करने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट 31 जुलाई, 2020 से पहले सरकार को सौंपे।

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