लखनऊ। राजधानी में मोहर्रम के 40वें दिन मंगलवार को चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। करीब 5 किलोमीटर लंबा जुलूस चौक स्थित नाजिम साहब इमामबाड़ा से शुरू होकर तालकटोरा स्थित कर्बला तक गया। जुलूस में शिया समुदाय के हजारों लोग काले कपड़े पहनकर और नंगे पैर शामिल हुए। इमामबाड़ा नाजिम साहब के बाहर जमीन पर अमेरिका और इजराइल के झंडे के साथ डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीर लगाई गई। इसे लोग पैरों से रौंदते हुए आगे बढ़ बढ़े। जुलूस में सबसे आगे अकीदतमंद करीब 25 फीट ऊंचा हजरत अब्बास का अलम-ए-मुबारक लेकर चले। कई लोग ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके बेटे मोजतबा खामेनेई की तस्वीरें लेकर भी जुलूस में शामिल हुए। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने जंजीरों से मातम किया। मातम से कई अकीदतमंदों के शरीर पर चोट के निशान दिखाई दिए। वे लहूलुहान नजर आए। जुलूस को लेकर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस दौरान एक छोटी बच्ची ने लोगों को मेलोडी टॉफी बांटी। एक कुंतल ड्राई फ्रूट से बना अलम जुलूस में शामिल किया गया। इसमें 20 किलो तालमखाना, 40 किलो छुहारा, 15 किलो अखरोट, 5 किलो गरी और 20 किलो खजूर का इस्तेमाल किया गया। शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ आज से 40 दिन पहले कर्बला में शहीद हुए थे उन्हीं की याद में चेहल्लुम का जुलूस निकाला जाता है। यहां पर अमेरिका और इजराइल का झंडा इसलिए पैरों से रौंदा जा रहा है क्योंकि नेतन्याहू और ट्रंप इंसानियत के दुश्मन हैं। इमामबाड़ा नाजिम साहब के मुख्य द्वारा पर अमेरिका और इजरायल के झंडे के साथ डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीर लगाई है जिसे लोग पर से रौंदते हुए आगे बढ़ रहे हैं। चेहल्लुम का जुलूस चौक थाना क्षेत्र के नाजिम साहब इमामबाड़ा (विक्टोरिया स्ट्रीट) से शुरू होगा। मेफेयर तिराहा, नक्खास, तुड़ियागंज तिराहा, बिल्लौचपुरा, बाजारखाला, कर्बला पुत्तनशाह, हैदरगंज तिराहा, बुलाकी अड्डा और एवरेडी तिराहा होते हुए कर्बला तालकटोरा पहुंचकर संपन्न होगा।
नगराम कस्बा में मंगलवार के दिन चेहल्लुम का जुलूस नम आंखों और गंगा-जमुनी तहजीब के साथ निकाला गया। इस दौरान हिन्दू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल देखने को मिली। मुस्लिम समुदाय के साथ हिन्दू समुदाय के लोगों ने भी नोहा और मर्सिया पढ़कर इमाम हुसैन को याद किया और मातम में शामिल हुए। गम-ए-हुसैन की याद में किला से ताजिया उठाए गए जो कस्बा बैजू तिराहा और बस अड्डा चौराहा होते हुए कर्बला पहुंचा, जहां ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। रास्ते भर नोहा-मर्सिया की सदा से माहौल गमगीन हो गया। लोगों की आंखें नम हो उठीं।
जुलूस में ग्रामीणों के साथ-साथ क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए। हिन्दू समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सामाजिक एकता का संदेश दिया। जगह-जगह लंगर और छबील का इंतजाम किया गया था। ताजियादार गुड्डन अब्बास ने बताया कि नगराम में हर साल की तरह इस बार भी किला से मसरूम मियां के दरवाजे से जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से निकाला गया जिसमें हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करते हुए सभी समुदाय के लोग एक साथ शामिल हुए और जुलूस सकुशल संपन्न हुआ। थानाध्यक्ष नगराम अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि चेहल्लुम का जुलूस शांतिपूर्ण सम्पन्न हो गया सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर वरिष्ठ उपनिरीक्षक उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में पुलिस बल मौजूद रहा।





