लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों से होने वाली दुर्घटनाओं में यात्रियों और अन्य प्रभावित लोगों को आर्थिक सहारा देने के लिए संचालित यात्री राहत एवं सुरक्षा योजना पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी मदद का माध्यम बनी है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच मृत्यु और घायल होने के कुल 342 मामलों में 17.33 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है।
योजना के तहत वर्ष 2017 से पहले उपलब्ध दो वर्षों 2015-16 और 2016-17 में मृत्यु के आठ मामलों में 40 लाख रुपये की सहायता दी गई थी। इसके बाद वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक नौ वर्षों में मृत्यु के 322 मामलों में करीब 17.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। वहीं घायल यात्रियों के 20 मामलों में 24.37 लाख रुपये की सहायता दी गई। वर्ष 2017-18 से 2025-26 के दौरान मृतकों के आश्रितों को लगातार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। इस अवधि में सबसे अधिक वर्ष 2019-20 में 78 मृत्यु मामलों में करीब 3.68 करोड़ रुपये की सहायता दी गई।
वर्ष 2021-22 में 48 मामलों में लगभग 2.37 करोड़ रुपये, 2017-18 में 42 मामलों में करीब 2.10 करोड़ रुपये, 2023-24 में 32 मामलों में 1.85 करोड़ रुपये और 2025-26 में 27 मामलों में 1.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार सड़क दुर्घटना में जान गंवाने या घायल होने वाले लोगों और उनके परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत उपलब्ध कराने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। साथ ही दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए चालकों, कर्मचारियों और बसों के बेड़े की नियमित निगरानी की जा रही है। योजना के नए प्रावधानों में दुर्घटना में मृत्यु होने पर राहत राशि बढ़ाई गई है।
वयस्क यात्री की मृत्यु पर 7.50 लाख रुपये, आधा टिकट लेने वाले बच्चे की मृत्यु पर 3.75 लाख रुपये और परिवहन निगम के नियमों के तहत निशुल्क यात्रा करने वाले छोटे बच्चे की मृत्यु पर करीब 1.87 लाख रुपये की सहायता निर्धारित की गई है। इससे दुर्घटना में परिवार के कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होने पर आश्रितों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। बस दुर्घटना में घायल होने वाले यात्रियों के लिए भी योजना में आर्थिक सहायता का प्रावधान है। सामान्य रूप से घायल होने पर उपचार के लिए 10 हजार रुपये तक और गंभीर रूप से घायल होने पर 25 हजार रुपये तक की अग्रिम सहायता संबंधित अधिकारी द्वारा दी जा सकती है। यदि प्रारंभिक सहायता के बाद उपचार पर अधिक खर्च आता है तो चिकित्सकीय उपचार के प्रमाणित बिल और संबंधित मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से जारी स्वास्थ्य लाभ प्रमाणपत्र के आधार पर आगे की सहायता की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
योजना के मूल प्रावधानों के तहत सामान्य चोट के लिए अधिकतम 25 हजार रुपये, गंभीर चोट के लिए एक लाख रुपये और अति गंभीर चोट अथवा शरीर के 50 प्रतिशत से अधिक जलने जैसी स्थिति में 2.50 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है। यात्री राहत योजना का दायरा अप्रैल 2026 में और बढ़ाया गया है। अब ऐसे राहगीर या अन्य व्यक्ति, जो निगम की बस में यात्रा नहीं कर रहे हों, लेकिन निगम अथवा अनुबंधित बस की दुर्घटना में घायल या मृत हो जाते हैं, उन्हें भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है। ऐसे व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक और गंभीर रूप से घायल होने पर 2.50 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, पुलिस रिपोर्ट और परिवहन निगम के जांच अधिकारी की रिपोर्ट में यदि दुर्घटना के लिए संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो योजना के तहत आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी। सरकार और परिवहन निगम का कहना है कि योजना का उद्देश्य दुर्घटना के बाद पीड़ितों और उनके परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए दुर्घटनाओं की संख्या कम करने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है।





