लखनऊ। कोरोना के बढ़ते संक्रमण की रोकथाम के लिए यूपी के गांवों में आयुष काढ़ा बांटने की तैयारी है। लॉकडाउन के बीच लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने आयुष विभाग की मदद से इस काढेÞ के वितरण का निर्णय लिया है। इसी के तहत 55 निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों के माध्यम से प्रदेश भर के करीब 305 गांवों में घर-घर जाकर काढ़ा पिलाया जायेगा। उत्तर प्रदेश के निदेशक, आयुर्वेदिक सेवाएं प्रो. एसएन सिंह ने निजी क्षेत्र के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सालयों के प्राचार्य व प्रबंधकों को इस संबंध में आदेश जारी किया है।
आयुष मंत्रालय ने कोरोना संकट के बीच हर किसी की सेहत सही रखने और इम्युनिटी मजबूत करने को लेकर उपायों को बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस पर मुहर लगाई थी। इस क्रम में वर्तमान स्थिति में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव से जनमानस को सुरक्षित रखने तथा बताये गये उपायों से जनसामान्य को जागृत करने का कार्य किया जाएगा। लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुष काढ़ा का वितरण किया जाएगा।
इसके लिए निजी क्षेत्र के आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालयों की टीम गांव-गांव जाकर आयुष काढ़ा बांटेगी। निर्देश दिये गये हैं कि कम से कम 90 किग्रा की मात्रा में बनवाकर 50 ग्राम की पैकिंग में लोगों को बांटा जाए। यह भी कहा गया है मात्रा बढ़ने पर जिलों में जिलाधिकारी व क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी से समन्वय स्थापित करते हुए काढे का वितरण कराया जाएगा। इसकी उपलब्ध्ता पर जिले के क्वारंटीन सेंटरों पर भी इसका वितरण किया जाएगा।
आयुर्वेदिक कॉलेजों की मान्यता की शर्तों के अनुसार उन्हें पांच-पांच गांव गोद लेने होते हैं। यह कॉलेज आयुष काढ़े का वितरण इन्हीं गांवों में करेंगे। आयुष मंत्रालय ने प्रदेश के आयुष महकमे को कोरोना से बचाव के लिए लोगों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा वितरण के निर्देश दिए थे। इसी के तहत उत्तर प्रदेश के आयुर्वेदिक सेवायें के निदेशक प्रो. एसएन सिंह ने यह आदेश जारी किया है। इस आदेश के बाद टीमोंं ने कार्य भी शुरू कर दिया है। इस कार्य में डॉक्टर फार्मासिस्ट, कंपाउंडर और आयुष स्वास्थ्य कार्यकतार्ओं को लगाया गया है। सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेजों में पहले से इसका वितरण किया जा रहा है।
यह है बनाने की विधि
आयुष मंत्रालय ने राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को काढ़ा बनाने की विधि सौंपी है। मंत्रालय ने इस काढ़े से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का दावा किया है। भेजे गए पत्र में कहा गया कि आयुष काढ़ा तुलसी, दालचीनी, सुंथी (अदरक चूर्ण) और कृष्णा मरीच (कालीमिर्च) से बनेगा। इसे बनाने के लिए 3-5 ग्राम (3/4 से एक चम्मच) चूर्ण को दो कप पानी में धीमी आंच पर एक कप शेष रहने तक उबालें। आधा कप काढ़ा गुनगुनाकर दिन में दो बार पीयें। इसमें स्वादानुसार गुड़ अथवा नींबू मिला सकते हैं। इस काढ़ा को प्रतिदिन ताजा बनाकर चाय के स्थान पर प्रयोग कर सकते हैं। 50 ग्राम के इस पैकेट को बेचा नहीं जा सकेगा। पैकिंग पर विधि सहित सीएम व मंत्री की फोटो युक्त पम्फलेट भी चस्पा रहेगा।
इम्यून सिस्टम को मजबूत करेगा
दरअसल, कोविड-19 का असर उन लोगों पर सबसे ज्यादा हो रहा है, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है। इम्यून सिस्टम रोगों से लड़ता है। इम्यून सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए आयुष मंत्रालय ने कोरोना से बचने के लिए लोगों से काढ़े का सेवन करने पर जोर दिया है, जिससे इम्यूनिटी मजबूत हो। किसी भी बीमारी से निपटने के लिए इम्यून सिस्टम का मजबूत होना बहुत जरूरी है, जिसमें यह काढ़ा आपकी बहुत मदद कर सकता है।
कालीमिर्च व सोंठ में होते हैं एंटीऑक्सीडेंट
कालीमिर्च में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो हमारे इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में हमारी मदद करते हैं। गले में खराश की समस्या, गले में दर्द होना, टॉन्सिल्स जैसी समस्या से निजात पाने के लिए कालीमिर्च का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद है। अदरक को अच्छी तरह से सुखाने पर यह सोंठ बन जाती है। सोंठ का भी इस्तेमाल इस काढ़े में किया गया है। इसमें भी एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। इसे एंटीमाइक्रोबियल थैरेपी भी कहा जा सकता है। इसमें भी एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। इन सभी का इस्तेमाल बहुत अधिक मात्रा में करने से भी यह नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए सही मात्रा में लेना आवश्यक है।





