ज्योतिष एवं वास्तु सम्मेलन संपन्न
कैरियर, विवाह, व्यापार, स्वास्थ्य एवं वास्तु से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों का विशेषज्ञों ने दिया समाधान, संयुक्त परिवार एवं संस्कारों पर दिया विशेष बल
लखनऊ। आनंदमय पावन वषार्योग समिति के तत्वावधान में पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य ज्योतिष एवं वास्तु सम्मेलन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों एवं युवाओं ने भाग लेकर अपने जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। सम्मेलन में विख्यात जैन ज्योतिषाचार्य रवि जैन गुरुजी (दिल्ली), सुशील कुमार जैन (ज्योतिष, कर्मकांड एवं पूजन विशेषज्ञ), डॉ. हुकुमचंद जैन (ग्वालियर) तथा वास्तुविद राजीव जैन (दिल्ली) ने उपस्थित लोगों की जिज्ञासाओं का विस्तारपूर्वक समाधान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं एवं कैरियर चयन, युवाओं ने रोजगार एवं भविष्य, अभिभावकों ने बच्चों के विवाह, व्यापारियों ने व्यापार वृद्धि, नौकरीपेशा लोगों ने पदोन्नति तथा अनेक लोगों ने स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख-शांति एवं जीवन की विभिन्न समस्याओं से जुड़े प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने ज्योतिष, वास्तु एवं व्यावहारिक जीवन के अनुभवों के आधार पर संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचन में कहा कि ज्योतिष व्यक्ति के जीवन में टॉर्च का कार्य करता है। जैसे अंधकार में टॉर्च मार्ग दिखाती है, वैसे ही ज्योतिष जीवन की सही दिशा का बोध कराता है। वास्तु के विषय में उन्होंने कहा कि वास्तु आपके खाने और सोने की दशा एवं दिशा को नियंत्रित करता है। जैसा आपका खान-पान होगा, वैसी आपकी दशा बनेगी और जैसी आपकी निद्रा की दिशा होगी, वैसा ही जीवन प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि जीवन में ज्योतिष और वास्तु तभी सार्थक हैं, जब व्यक्ति अपने आचरण, संस्कार, संयम और सद्विचारों को भी अपनाए। अच्छे संस्कार, स्वस्थ परिवार और सकारात्मक सोच ही सुखी जीवन का वास्तविक आधार हैं। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने विशेषज्ञों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन की सराहना करते हुए इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया। आनंदमय पावन वषार्योग समिति द्वारा आयोजित यह सम्मेलन समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला प्रेरणादायी आयोजन सिद्ध हुआ।
रवि जैन गुरुजी ने दिया कैरियर, व्यापार एवं विवाह पर मार्गदर्शन
दिल्ली से पधारे विख्यात जैन ज्योतिषाचार्य रवि जैन गुरुजी से विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, व्यापारियों ने व्यापार में लगातार आ रही बाधाओं तथा अभिभावकों ने विवाह में विलंब से जुड़े प्रश्न पूछे। उन्होंने कहा कि ज्योतिष भाग्य का नहीं, सही दिशा का मार्गदर्शक है। नियमित परिश्रम, अनुशासन और उचित समय पर लिए गए निर्णय सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार में सही समय, सही निर्णय एवं सकारात्मक सोच अत्यंत आवश्यक है तथा विवाह में केवल ग्रह नहीं, बल्कि संस्कार, परिवार और आपसी समझ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सुशील कुमार जैन ने संस्कार, पूजा एवं पारिवारिक शांति पर दिया जोर
ज्योतिष एवं कर्मकांड विशेषज्ञ सुशील कुमार जैन से श्रद्धालुओं ने घर में अशांति, पूजा-पाठ की उपयोगिता तथा बच्चों में संस्कारों को लेकर प्रश्न किए। उन्होंने कहा कि नियमित पूजा, नमोकार मंत्र का जाप, धार्मिक वातावरण और परिवार के सदस्यों का सकारात्मक व्यवहार जीवन में शांति एवं सुख का आधार है। उन्होंने कहा कि बच्चों में संस्कार देने की शुरूआत परिवार से होती है।
डॉ. हुकुमचंद जैन ने विवाह एवं संयुक्त परिवार की महत्ता समझाई
ग्वालियर से पधारे डॉ. हुकुमचंद जैन से सर्वाधिक प्रश्न विवाह संबंधी समस्याओं पर पूछे गए। उन्होंने कहा कि आज विवाह में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि परिवार एवं संस्कारों की अपेक्षा पैकेज और आय को अधिक महत्व दिया जा रहा है। पहले परिवार, खान-पान, संस्कार और चरित्र को देखा जाता था, इसलिए वैवाहिक जीवन अधिक सफल रहता था। उन्होंने संयुक्त परिवार को समाज की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि परिवार में बुजुर्गों का अनुभव और बच्चों के संस्कार ही समाज की वास्तविक पूंजी हैं।
राजीव जैन ने वास्तु के वैज्ञानिक पक्ष को समझाया
दिल्ली से आए वास्तुविद राजीव जैन से घर एवं प्रतिष्ठान के वास्तु को लेकर अनेक प्रश्न पूछे गए। उन्होंने बताया कि वास्तु पंचमहाभूतों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के संतुलन पर आधारित है। यदि रसोई जैसी अग्नि से संबंधित व्यवस्था अनुचित दिशा, विशेषकर जल तत्व वाले स्थान पर हो, तो उसका प्रभाव व्यापार, स्वास्थ्य एवं पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है। उन्होंने घर एवं कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए सही दिशा, स्वच्छता एवं प्राकृतिक प्रकाश का महत्व बताया।
आज से शुरू होगा सिद्धचक्र महामंडल विधान
इन्दिरा नगर जैन मंदिर
लखनऊ। दिगंबर जैन परंपरा के प्रख्यात संत आचार्य श्री सुबल सागर जी महाराज का अपने शिष्य मंडल (कुल 8 संत) के साथ इंदिरा नगर स्थित जैन मंदिर में विराजमान हैं। समाज के मंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि आचार्य श्री के सानिध्य में 21 जुलाई से 28 जुलाई तक आठ दिवसीय ‘श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। विधान से पूर्व मंगलवार को महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकाली जाएगी उसके बाद विधान शुरू होगा। उन्होंने बताया कि आचार्य श्री का यह मंगल पदार्पण लखनऊ में आगामी ‘चातुर्मास’ के पावन निमित्त से हुआ है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगी कलश स्थापना
श्री जिनशासन प्रभावना चातुर्मास समिति के अध्यक्ष संजीव जैन ने बताया कि इस वर्ष के चातुर्मास कलश स्थापना का मुख्य कार्यक्रम गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व 29 जुलाई को गोमती नगर स्थित ‘इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान’ में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान भव्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। आचार्य संघ के स्वागत और मंगल प्रवेश के इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए लखनऊ के अतिरिक्त सिधौली, बाराबंकी, सीतापुर, बिसवां और हरदोई सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे।





