श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों ने बृहस्पतिवार को नियंत्रण रेखा (एनओसी) के पास घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी और दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सतर्क सुरक्षा बलों ने उत्तरी कश्मीर जिले के केरन सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी। उन्होंने बताया कि दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया है। अभियान जारी है।
रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि गंभीर रूप से घायल एक सैनिक को चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थिति के बावजूद एक हेलीकॉप्टर से उधमपुर स्थित कमांड अस्पताल पहुंचाया गया। प्रवक्ता ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, उधमपुर स्थित वायुसेना के अड्डे के एक हेलीकॉप्टर से डोडा में गंभीर रूप से घायल एक सैनिक को चुनौतीपूर्ण मौसम के बावजूद कमांड अस्पताल समय पर पहुंचाया गया जिससे उनकी जान बच गई। टीम को उनके समर्पण और बहादुरी के लिए बधाई। इसके अलावा, बुधवार देर रात राजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास एक अग्रिम चौकी की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबलों ने संदिग्ध गतिविधियां देखने के बाद गोलीबारी की।
अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया लेकिन वहां कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं दिखी। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात को आतंकवादियों के हमले में एक कैप्टन सहित सेना के चार जवान शहीद हो गए, जिसके बाद देसा और आसपास के वन क्षेत्रों में व्यापक तलाश अभियान शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल आतंकवादियों का सफाया करने और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
डोडा-किश्तवाड़ के रामबन रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक श्रीधर पाटिल ने कास्तीगढ़ में संवाददाताओं से कहा, सभी सुरक्षा बल आतंकवादियों के खिलाफ एक समन्वित अभियान में जुटे हुए हैं। हमारा उनके साथ कल और आज भी संपर्क हुआ। अभियान प्रगति पर है और हमें जल्द ही सफलता मिलेगी। हालांकि, उन्होंने अभियान जारी रहने का हवाला देते हुए अधिक जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि स्कूल भवन के अंदर शिविर लगा रहे सुरक्षाबलों पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया और घने जंगल की ओर भाग गए। इस हमले में सेना के दो जवान घायल हो गए।
आतंकवादियों की तलाश के लिए सुरक्षाबलों का अभियान जारी है लेकिन भारी बारिश और घने कोहरे के कारण सुरक्षाबलों की चुनौती और बढ़ गई। माना जा रहा है कि ये आतंकवादियों का वही समूह है जिसके हमले में सेना के चार जवान शहीद हो गए थे। सैन्यकर्मियों की शहादत के बाद देसा और आसपास के वन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। बृहस्पतिवार को तलाश अभियान का चौथा दिन है। इससे पहले, मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को देसा के जंगलों में दो जगहों पर सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच कुछ देर के लिए गोलीबारी हुई।
आतंकवाद से 2005 में मुक्त हो चुके डोडा जिले में 12 जून के बाद से सिलसिलेवार आंतकी हमले देखे जा रहे हैं, जब चत्तरगला र्दे में आतंकवादी हमले में छह सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। इसके अगले दिन गंडोह में हुई गोलीबारी में भी एक पुलिसकर्मी घायल हो गया था। इसके बाद, 26 जून को जिले के गंडोह इलाके में दिन भर चले अभियान में तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया था, जबकि नौ जुलाई को घड़ी भगवा जंगल में एक और मुठभेड़ हुई थी। इस वर्ष की शुरुआत से अब तक जम्मू प्रांत के छह जिलों में लगभग 12 आतंकवादी हमलों में 11 सुरक्षाकर्मियों, एक ग्राम रक्षा गार्ड और पांच आतंकवादियों सहित कुल 27 लोग मारे गए हैं। इन मृतकों में नौ जून को रियासी जिले के शिव खोड़ी मंदिर से लौट रहे सात तीर्थयात्री भी शामिल हैं।





