लखनऊ। अंगूर तो आपने खूब खाए होंगे लेकिन अंगूर के आकार का आम क्या देखा है? अगर नहीं तो आपको बता दें कि इस साल आमों के सीजन में अंगूर के आकार का आम लोगों की जुबान पर अपने स्वाद का जलवा बिखेरे हुए है। इसका नाम है अंगूर दाना।
इस अनोखे आम का आकार भी अंगूर के बराबर है। वजन में ये आम मात्र 5 ग्राम का है, लेकिन खाने में इतना मीठा है कि आप दशहरी को भी भूल जाएंगे।
दरअसल दुनिया के सबसे छोटे आम का दर्जा इसे मिला हुआ है। इसी साल यह आम उगा भी है और खास बात यह है कि इस आम को उगाया है अपने बाग में एससी शुक्ला ने जो कि लखनऊ के रहने वाले हैं, वो अपने बाग पर 300 से ज्यादा वैरायटी के आम उगा चुके हैं।
गुच्छे में आता है ये आम:
खास बात यह है कि अंगूर दाने का पेड़ अंगूर की ही तरह होता है। यह आम गुच्छे में आता है। देखने में पूरी तरह से अंगूर की तरह ये आम लगते हैं। इसी महीने जुलाई में होने जा रहे आम महोत्सव में एससी शुक्ला दुनिया के सबसे छोटे आम अंगूर दाना को लॉन्च करेंगे। आपको बता दें कि एससी शुक्ला वही हैं जिन्होंने पिछले साल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर योगीराज आम लॉन्च किया था और जिसकी खूब चर्चा हुई थी।
300 से ज्यादा आमों की देसी-विदेशी प्रजातियां :
एससी शुक्ला ने बताया कि उन्हें आमों को लगाने का शौक था, तो एक बाग तैयार किया, फिर विभिन्न प्रजातियों को इसमें लगाना शुरू किया। परिणाम अच्छा निकला तो इस काम को करते-करते अब 11 साल हो गए हैं। करीब 300 से ज्यादा देसी-विदेशी प्रजातियां आमों की यहां पर मिलती हैं। आमों के जनक एससी शुक्ला ने बताया कि इस आम को अंगूर दाना का नाम दिया गया है। इसका स्वाद खाने में इतना मीठा है कि आप दशहरी, लंगड़ा, सफेदा और चौसा को भी भूल जाएंगे।
बड़ी हस्तियां भी हैं स्वाद के मुरीद:
एससी शुक्ला के आमों के स्वाद का मुरीद न सिर्फ लखनऊ बल्कि इनके आम के स्वाद के दीवानों में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मशहूर कवि कुमार विश्वास, अभिनेता अनुपम खेर, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ ही योग गुरु बाबा रामदेव भी हैं।
नेचुरल ब्रीड है अंगूर दाना:
एससी शुक्ला से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि अंगूर दाना एक नेचुरल ब्रीड है। इसे इन्होंने शौक में उगाया है। देश की मशहूर हस्तियों के पास इसे भेजा है, उन्हें इसका स्वाद काफी पसंद आया है। बाजार में इसे इसलिए नहीं उतारेंगे क्योंकि इसके लिए इसका बड़ी मात्रा में पैदावार करनी होगी।
डाल पके ‘दशहरी आम’ ने बाजार में दी दस्तक

लखनऊ। फलों का राजा ‘दशहरी आम’ की दस्तक राजधानी के बाजारों में शुरू हो गई है। इस बार दाग रहित साफ दशहरी के सामने आने से किसान और कारोबारी दोनों ही उत्साहित हैं। पिछली बार की तुलना में इस बार रेट भी बेहतर खुला है। पिछली बार थोक मंडी में दशहरी करीब 30 से 35 रुपये किलो थी जो इस बार 45 से लेकर 55 रुपये किलो तक है। करीब 15 से बीस रुपये किलो का अंतर थोक मंडी में है। फुटकर मंडी में डाल वाली दशहरी की कीमत 60 से 80 रुपये किलो तक है। शुरूआती रेट बेहतर होने से कारोबारी कह रहे हैं कि माल भले ही थोड़ा कम उतरा है लेकिन गुणवत्ता बेहतर होने के कारण दशहरी की डिमांड अच्छी है। दशहरी का सीजन करीब डेढ़ से दो माह का रहता है। इस दौरान करीब दो लाख क्विंटल से अधिक आम की आवक मंडी में रहती है। फल मंडी में अन्य चीजों की डिमांड कम हो जाती है। आगामी चार-पांच दिनों में दशहरी मंडी में पूरी तरह से छा जाएगी। कह सकते हैं कि जब तक दशहरी मंडी में रहती है तब तक अन्य फलों की चमक कम रहती है। दशहरी की पहली एक टन की खेप ओमान के लिए 15 को निकलेगी। आर्डर मिलने के बाद आम की प्रोसेसिंग मैंगो पैक हाउस में शुरू होने जा रही है। मैंगो पैक हाउस के अकरम बेग बताते हैं कि आम की बैक्टीरिया मुक्त करने के बाद उसकी पैकिंग की जाएगी।
पाल और डाल में यह है अंतर :
टपका हुआ आम या फिर तोड़कर उसे केमिकल के सहारे पकाया जाता है। उसे पाल वाली दशहरी के नाम से जाना जाता है। जब तक आम में पूरी तरह से जाली नहीं पड़ जाती है तब तक लोग स्वाद के लिए इसे प्रयोग करते हैं। डाल वाली दशहरी सीधे पेड़ से तोड़कर साफ-सफाई कर उसे बाजार में सीधे लाया जाता है। इसकी डिमांड ज्यादा होती है।





