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प्रभु श्री राम को देखना किसी उत्सव से कम नहीं होता : कनु पटेल

अखिल भारतीय कला शिविर कलर्स आफ अयोध्या का समापन
लखनऊ। कला दीर्घा अंतरराष्ट्रीय दृश्य कलापत्रिका एवं जेबीएनएसएस अयोध्या द्वारा 15 से 19 जून तक संयुक्त रूप से अयोध्या में आयोजित अखिल भारतीय कला शिविर कलर्स आफ अयोध्या का समापन भव्य प्रदर्शनी एवं राम कथा पर आधारित अवधी लोक नृत्य फरवाही की प्रस्तुति के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर जितेंद्र शर्मा, कमांडेंट, डोगरा रेजीमेंटल सेंटर थे। मुख्य अतिथि ने कलाकारों द्वारा रची गई और प्रदर्शित कलाकृतियों को सूक्ष्मता से अवलोकन एवं कलाकारों से विचार विमर्श किया।
प्रदर्शनी देखने के क्रम में सर्वप्रथम गुजरात से आए प्रख्यात कलाकार एवं रंगकर्मी कनु पटेल की कलाकृतियाँ देखीं। उन्होंने बताया कि प्रभु श्री राम को देखना किसी उत्सव से कम नहीं होता है इसीलिए मेरे चित्रों में उत्सव धर्मिता और प्रभु श्री राम का दर्शनीय स्वरूप मैंने अपनी शैली में चित्रित किया है। इस शिविर के वरिष्ठतम कलाकार आचार्य श्याम शर्मा ने बाल हनुमान की छवि को एक नए रूप में प्रस्तुत किया है। मूलत: छापा कलाकार होने के कारण उनके चित्रों में निश्चित रूप से छाप के गुण भी आए हैं जो चित्र को चार चांद लगाते हैं। आचार्य शर्मा ने दूसरे चित्र में भए प्रगट कृपाला को अपनी कला भाषा में प्रस्तुत किया है।

महाराष्ट्र के वरिष्ठ कलाकार आचार्य डगलस जॉन ने अपने चित्र में अयोध्या के पुराने स्वरूप और वहां राम जन्मभूमि का अस्तित्व अपनी शैली में बखूबी दिखाया है और आस्था की सर्वोच्च महत्व को दूर खड़े एक भक्त के माध्यम से दशार्ने का प्रयास किया है। महाराष्ट्र से ही आए दूसरे कलाकार रामचंद्र खरटमल ने जहां श्री राम मंदिर के उच्च आकर्षण को अनुभूत कर अपने चित्रों में प्रभु श्री राम के साथ स्थान दिया है, वहीं दूसरे चित्र में अयोध्या की राजकुमारी का कोरिया के राजकुमार से विवाह के माध्यम से सांस्कृतिक संबंध को उजागर किया है। प्रदर्शनी में सम्मिलित बंगाल से आए कलाकार सुकांत दास के चित्र में बजरंगबली अपने उत्कृष्ट स्वरूप में बलशाली, दयालु और सबके रक्षक के रूप में उपस्थित हैं। ओडिशा से सम्मिलित वरिष्ठ कलाकार मानस जेना ने बाबा तुलसीदास का चित्रण किया है जिनके माध्यम से प्रभु रघुनाथ गाथा आज जन-जन में व्याप्त है। तेलंगाना से आई अर्पिता रेड्डी ने अपने चित्र में भगवान विष्णु के स्वरूप प्रभु श्री राम का चित्र भव्य रूप में प्रस्तुत किया है जिसके नीचे दक्षिणी भारतीय परिधान अलंकरण के साथ बॉर्डर आकर्षण बन रहा है। मध्य प्रदेश से पधारी तृप्ति जोशी ने राम मुद्रिका और राम धनुष को एक नए रूप में प्रस्तुत किया है।


कला दीर्घा अंतरराष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका के संपादक एवं शिविर के क्यूरेटर जो शिविर में उत्तर प्रदेश राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे थे उन्होंने अपने एक चित्र में राम भक्त हनुमान को रक्षक के रूप में विशेषरूप से अपनी शैली में बिजूका के रूप में स्थापित किया है। जिस तरह बिजूका हरी-भरी खेती की रक्षा करता हुआ सदियों से खड़ा सारे मानवीय विकास क्रम को देख रहा है। इस तरह हनुमानजी को भी जिसने याद किया उसकी सहायता के लिए वे उपस्थित मिले हैं। इस विषय को अवधेश मिश्र ने अपनी शैली में दशार्या है। इस चित्र में अयोध्या नगरी नवनिर्मित राम मंदिर और सरजू में प्रवाहित होते जल साथ में सृजन की प्रतीक दो मछलियां विद्यमान हैं जहां एक मोरनी चित्र को जीवंत कर रही है। दूसरे चित्र में अवधेश मिश्र ने तीन बिजूका जो विकास और परिवर्तन का साक्षी है को दशार्ते हुए बदलती अयोध्या को चित्रित किया है, जहां सब कुछ कृत्रिम होने की चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रही है। इस चित्र में भी मोरनी सामने सुवासित पुष्प को देख रही है जबकि चित्र के अन्य हिस्सों में गमले में कुछ पौधे दिखाई पड़ रहे हैं। अर्थात चित्र में प्रकृति से हमारी दूरी का स्पष्ट संकेत है। हरियाणा से आए आचार्य राम विरंजन ने अपने चित्रों में कुछ श्रद्धालुओं को बनाया है जो राम नाम के कीर्तन में मग्न है और उनकी पृष्ठभूमि में राम का अद्भुत चित्रण है। पूरा वातावरण संगीतमय है। चित्र विविध रंगों से परिपूर्ण है। प्रदर्शनी देखने के उपरांत मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर जितेंद्र शर्मा, समस्त कलाकारों एवं कार्यक्रम की स्थानीय समन्वयक डॉ दिव्या शुक्ला और आयोजन की संरक्षक मंजुला झुनझुनवाला को कालादीर्घा की 25 वर्ष की सफल यात्रा पूरी होने पर प्रकाशक प्रख्यात शिक्षाविद डॉ लीना मिश्र ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
समापन समारोह में अपने उद्बोधन में जहां पद्मश्री आचार्य श्याम शर्मा जी ने मुख्य अतिथि को इंगित करते हुए यह कहा कि ब्रिगेडियर जितेंद्र शर्मा और उनकी सैन्य व्यवस्था हमसे इस तरह जुड़ती है कि ये देश की रक्षा कर हमको स्वतंत्र रखते हैं कि हम अपनी कला रचना करके संस्कृति को सुरक्षित और संरक्षित कर सकें, वहीं मुख्य अतिथि जितेंद्र शर्मा, कमांडेंट डोगरा रेजिमेंट ने कहा कि कलाओं की दुनिया में आकर मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला और मेरे लिए आजीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहेगा। सभी कलाकारों ने कलाओं का उच्च प्रदर्शन किया है और यह देश की धरोहर है। कला दीर्घा के संपादक डॉ अवधेश मिश्र ने कहा कि यह कार्यक्रम शुरूआत है, इस आयोजन का वृहद रूप वार्षिक अनुष्ठान के रूप में कलर्स आॅफ अयोध्या इस नगर को समर्पित किया जाएगा जिसमें कला दीर्घा और जेबीएनएस सोसायटी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेगी और अयोध्या के बहाने राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य को सुरक्षित, संरक्षित एवं परिवर्धित करेगी।

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