लखनऊ। सावन का महीना शुरू होते ही हरियाली तीज का इंतजार भी शुरू हो जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को समर्पित माना जाता है। हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखती हैं। वहीं कई अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की इच्छा से यह व्रत करती हैं। उत्तर भारत के कई राज्यों में यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरियाली तीज सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट साथ का प्रतीक है। यही वजह है कि हर साल लाखों महिलाएं इस पर्व का इंतजार करती हैं और पूरे श्रद्धा भाव से इसे मनाती हैं। पंचांग के अनुसार हरियाली तीज सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त को है। इस दिन सुबह से ही मंदिरों में शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। महिलाएं व्रत रखती हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं। पूजा का शुभ समय तृतीया तिथि में ही माना जाता है। इसलिए व्रत रखने वाले लोगों को अपने शहर के पंचांग के अनुसार पूजा का समय देख लेना चाहिए।
क्या है हरियाली तीज का महत्व?
धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से हरियाली तीज का व्रत पति-पत्नी के रिश्ते और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है। अविवाहित लड़कियां अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं।
पूजा में किन चीजों की जरूरत होती है?
हरियाली तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या प्रतिमा, बेलपत्र, फूल, फल, मिठाई, हरी चूड़ियां, मेहंदी, सिंदूर और पूजा की दूसरी सामग्री रखी जाती है। पूजा के बाद शिव-पार्वती की आरती की जाती है और व्रत कथा सुनी जाती है।
इस दिन क्या करें?
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। अगर व्रत रख रहे हैं तो पूरे दिन मन को शांत रखें। जरूरतमंद लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देना भी शुभ माना जाता है। परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें।
क्या न करें?
हरियाली तीज के दिन किसी से बहस या झगड़ा करने से बचें। पूजा में जल्दबाजी न करें। अगर व्रत रखा है तो नियमों का पालन करें। बिना वजह किसी का दिल न दुखाएं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत का शुभ फल मिलता है।





