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वैदिक काल से ही महिलाओं ने नेतृत्व की भूमिका निभाई है : प्रो. कुमकुम धर

भातखण्डे में भारतीय न्याय संहिता एवं ई-एफआईआर तथा महिलाओं के नेतृत्व में विकास विषयक संवाद का आयोजन

लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में आज भारतीय न्याय संहिता एवं ई-एफआईआर तथा महिलाओं के नेतृत्व में विकास विषयों पर दो महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रमों का आयोजन जयशंकर प्रसाद सभागार में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इन कार्यक्रमों में शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
प्रथम संवाद भारतीय न्याय संहिता एवं ई-एफआईआर विषय पर आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने की। मुख्य वक्ता के रूप में उच्च न्यायालय, लखनऊ की वरिष्ठ अधिवक्ता बुलबुल गोडियाल ने न्याय व्यवस्था में हो रहे आधुनिक परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ई-एफआईआर की उपयोगिता, पारदर्शिता एवं सुलभता को रेखांकित करते हुए बताया कि अब शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया अधिक सरल एवं सुलभ हो गई है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता के प्रमुख प्रावधानों, साक्ष्य के रूप में डिजिटल माध्यमों (जैसे व्हाट्सएप आदि) की स्वीकार्यता, तथा महिलाओं से संबंधित मामलों में महिला पुलिस अधिकारी की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं होती है, तो संबंधित अधिकारी (एसपी/एसएसपी) अथवा न्यायालय के माध्यम से न्याय प्राप्त किया जा सकता है। द्वितीय संवाद महिलाओं के नेतृत्व में विकास विषय पर केन्द्रित रहा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. कुमकुम धर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वैदिक काल से ही महिलाओं ने नेतृत्व की भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्तमान समय में महिलाओं की भागीदारी कृषि, हस्तशिल्प, लघु उद्योग, कॉपोर्रेट क्षेत्र तथा नवाचार के क्षेत्र में निरंतर बढ़ने की बात कही। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि समाज एवं राष्ट्र के समग्र विकास हेतु महिलाओं की समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
विशिष्ट वक्ता प्रो० अमिता बाजपेयी (प्रोफेसर, शिक्षा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए कहा कि नेतृत्व क्षमता का निर्धारण लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सहभागिता नीति निर्धारण में बहुत कम है जबकि नेतृत्व का अवसर महिलाओं को जब भी मिला है उन्होंने बेहतर किया है अत: शीर्षस्थ स्थानों के नीति निर्धारण में उन्हें उचित अवसर मिलन आवश्यक है। महिलाओं को अपनी क्षमताओं के प्रदर्शन हेतु समान अवसर प्रदान किए जाने चाहिए, तभी वास्तविक समानता स्थापित हो सकेगी। कार्यक्रम के समापन में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि माननीय कुलाधिपति उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदत्त मार्गदर्शन विश्वविद्यालय को निरंतर नई दिशा प्रदान करता है। उनकी दूरदर्शिता एवं विशेषकर महिलाओं तथा विद्यार्थियों के हित में लिए गए निर्णयों से हम सभी निरंतर लाभान्वित हो रहे हैं। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. सृष्टि माथुर द्वारा किया गया । कार्यक्रम के संपन पर उन्होंने सभी वक्ताओं का आभार प्रकट किया तथा मंच संचालन विश्वविद्यालय की छात्रा पावनी अवस्थी ने किया। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ सृष्टि धवन ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है तथा नेतृत्व के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी समाज को नई दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहने चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में जागरूकता, ज्ञानवर्धन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित हो सके।

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