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मिट्टी की बनी बोतलें और घड़े कर रहे देशी फ्रिज का काम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मवैय्या क्षेत्र में इन दिनों लोगों की अच्छी भीड़ नजर आ रही है। वजह यह है कि यहां पर एक मिनट के अंदर ही पानी को ठंडा कर देने वाली बोतलें और घड़े मिल रहे हैं। इस भीड़ को लखनऊ की सरजमीं पर पहली बार गुजरात की लाल मिट्टी की बनी बोतलें और घड़े बेचे जा रहे हैं।
माटी हाउस के नाम से इस दुकान को चला रहे कृष्णा ने बताया कि यह दुकान करीब 50 साल पुरानी है। लेकिन पहली बार उन्होंने गुजरात की लाल मिट्टी की बनी हुई बोतलें और घड़े को नया लुक देकर और डिजाइनिंग अंदाज में बाजार में उतारा है। जो देखने में लोगों को बेहद आकर्षित भी लग रहे हैं और इनकी खास बात यह है कि सिर्फ एक मिनट के अंदर ही गर्म पानी भी इन बोतलों और घड़ों में रखने से ठंडा हो जाएगा। फ्रिज से भी जल्दी ठंडा पानी यह बोतले या घड़े कर देते हैं, इसलिए लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिन भर में 100 से ज्यादा पीस बिक रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनको धोने से कोई खराबी नहीं आयेगी। लाल मिट्टी के इन घड़ों और बोतलों में पानी पीने से सेहत भी अच्छी होती है।

बाजार में मिट्टी से बने मटके की अच्छी डिमांड:
बाजार में मिट्टी से बने मटके की अच्छी डिमांड देखी जा रही है। मिट्टी से बने मटके के अंदर हल्के हल्के छेद होते हैं, जिससे पानी हल्का-हल्का बाहर आता रहता है और वह मटकी को गीला रखता है। इससे हवा के संपर्क में आने से मटके का पानी फ्रिज की तरह ठंडा रहता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि मटके का पानी शरीर के पीएच लेवल को भी मेंटेन रखता है। मटके के पानी से शरीर में मिनरल्स की कमी भी पूरी हो जाती है। गर्मी में फ्रिज से बेहतर मटके का पानी पीना माना जाता है। गर्मी के साथ-साथ तापमान में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

इतनी है कीमत:
कृष्णा प्रजापति ने बताया कि उनके पास छोटी मिट्टी की बोतले 150 रुपए की हैं जबकि फिल्टर वाले घड़े 500 रूपए के हैं। डिजाइनिंग घड़े भी 500 रुपए के ही हैं। इनसे कम की कीमतों पर भी लोगों को घड़े और बोतलें मिल जाएंगी। रवि ने बताया कि इस व्यापार को उनकी मां ने शुरू किया था। उनके निधन के बाद उन्होंने इस व्यापार को आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाया है। वह बताते हैं कि उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से 2011 में बीएससी कंप्यूटर साइंस में किया था। इसके बाद रेलवे की तैयारी भी की थी लेकिन उसमें उनका सिलेक्शन नहीं हो पाया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी मां का ही व्यापार संभाला। चारबाग रेलवे स्टेशन और आलमबाग के बीच में मवैय्या क्षेत्र पड़ता है, इसकी प्रमुख रोड पर ही आपको माटी हाउस की दुकान दिख जाएगी।

रंग-बिरंगी मिट्टी की बोतलें कर रहीं आकर्षित
लखनऊ। माटी हाउस में आपको लाल मिट्टी की बनी हुई छोटी और बड़ी बोतलें दोनों मिलेंगी। दोनों पर खूबसूरत सी डिजाइन बनी हुई है। बोतलों की साइज के अनुसार ही उनके अंदर पानी भी आता है, किसी में सवा लीटर पानी आता है तो किसी में दो लीटर तक पानी आप भर कर रख सकते हैं। यही नहीं घड़े भी डिजाइनिंग है। इसके अलावा कार्टून के बने हुए घड़े भी यहां पर मिल रहे हैं, जिनके अंदर नल लगा हुआ है और देखने में वे किसी टेडी बियर से कम नहीं लग रहे।

सेहत के लिए अच्छा है मटके का पानी:
आमतौर देखा जाता है कि लोग गर्मी के दिनों में अपनी प्यास बुझाने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स या फ्रिज का बेहद ठंडा पानी पीते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसा करना सही नहीं है। अत्यधिक ठंडा पानी सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इससे सर्दी-जुकाम का अंदेशा रहता है। अक्सर लोग गर्मी के दिनों में धूप से आकर सीधे फ्रिज में रखा ठंडा पानी पी लेते हैं। इससे उनकी सेहत पर काफी असर पड़ता है। मिट्टी की बोतल में भरा हुआ पानी गर्मियों के दिनों में एक अलग ही मजा देता है.मानो फ्रिज आप के साथ हो, पानी अच्छे से ठंडा रहता है. और चूंकि ये मिट्टी की बोतल का ठंडा पानी रहता है इस लिए कोई नुकसान भी नही होता. जबकि मौसम में बदलाव के कारण फ्रिज का ठंडा पानी पीने से बीमार बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है. गर्मी में फ्रिज से निकला ठंडा पानी पीने से बच्चे बीमार हो रहे है, ऐसे में नार्मल या घड़े का पानी पीना चाहिए।

मिट्टी से बनी बॉटल बैग में रखकर दिनभर लें शीतल जल का आनंद
गर्मी की शुरूआत हो चुकी है। सूरज की तेज तपिश से लोगों का हाल बेहाल है. ऐसे में गला तर करने के लिए मिट्टी के मटके के पानी से बेहतर साधन कुछ और नहीं हो सकता. लोगों की पसंद आजकल चंदिया की मिट्टी से बने मटके हैं। चंदिया का मटका एक प्रकार से ब्रांड बन गया है। पूरे जिले आसपास चंदिया की मिट्टी से बने मटके की डिमांड हर साल रहती है। चंदिया के मटकों की दुकान जगह-जगह सजने लगी हैं। अब चंदिया के मटका व्यापारी अपने मटकों पर भी चंदिया लिखने लगे हैं। हर मटके पर चंदिया लिखा मिलेगा. चंदिया की मिट्टी से बने मटकों की डिमांड इतनी क्यों है, इसे जानने के लिए मटका खरीदने आए कुछ लोगों से ईटीवी भारत ने बात की। इनका कहना है कि चंदिया की मिट्टी से जो मटके बनाए जाते हैं, वह काफी मजबूत होते हैं.आसानी से टूटते-फूटते नहीं हैं। अन्य मटकों की अपेक्षा इन मटकों में पानी ज्यादा ठंडा होता है। साथ ही पानी स्वादिष्ट भी हो जाता है. इसलिए वो चंदिया के ही मटके खरीदते हैं. चंदिया के मटका व्यापारी राकेश प्रजापति बताते हैं कि इस मिट्टी की बात ही अलग है। चंदिया के मिट्टी से बने मटके पानी को अच्छी तरह से ठंडा करते हैं। इसलिए इसकी इतनी डिमांड है।

आधुनिक तरीके से बनने लगे हैं मटके :
प्रशांत सिंह कहते हैं कि बदलते वक्त के साथ मटका व्यापारियों ने भी काफी कुछ बदलाव किया है. जैसे घड़े पर टोंटी लगाना आदि. मिट्टी की ये बॉटल कामकाजी लोगों के लिए काफी सहूलियतभरी हैं. बढ़ती महंगाई के बाद भी इन मटकों के रेट नहीं बढ़े हैं. मटका व्यापारी राकेश प्रजापति बताते हैं कि दाम नहीं बढ़ाए. पिछले साल भी 100 में एक मटका दे रहे थे, मौजूदा साल भी 100 रुपये में एक मटका दे रहे हैं. साथ ही जो टोंटी लगे हुए मटके हैं, उनका रेट थोड़ा बढ़ाकर रखा गया है. क्योंकि उसमें थोड़ी एक्स्ट्रा वर्क किया गया है. इसलिए वह मटके 150 रुपए के करीब बेच रहे हैं. राकेश प्रजापति बताते हैं कि मिट्टी से बनी बॉटल 80 में दे रहे हैं।

फ्रीज का पानी करता है नुकसान
लोगों का कहना है फ्रिज का ठंडा पानी नुकसान करता है , हमें आज इस दौर में प्राकृतिक देसी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। मिट्टी से बने बर्तनों में पानी पीना चाहिए और खाना खाना चाहिए। पहले के लोग मिट्टी के बर्तन में खाना बनाते, खाते व पीते थे और वह अधिक समय तक स्वस्थ रहते थे. पहले के लोग बीमार भी जल्दी नहीं पढ़ते थे लेकिन जब से मार्केट में प्लास्टिक की बनी बोतल व बर्तन उपलब्ध हो गए हैं. तब से बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं बच्चों से लेकर व्यस्त व बुजुर्गों में प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीने से बीमारियां उत्पन्न हो रही है।

गर्मी बढ़ने के साथ पानी ठंडा रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ी
गर्मी के प्रकोप के साथ मिट्टी के बर्तनों घड़े ,सुराही, बोतल, गिलास इत्यादि की मांग में कई प्रतिशत का उछाल आया है। लोग स्वस्थ और प्राकृतिक ठंडक के लिए फ्रिज के बजाय मिट्टी के बर्तनों (देसी फ्रिज) को पसंद कर रहे हैं। स्टाइलिश और नई डिजाइन के कारण भी इनकी मांग में तेजी देखी जा रही है। सोमवार को अधिकतम तापमान 41.5 और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस हो गया है। यानी दिन का तापमान सामान्य से 2.7 और रात का 2.2 डिग्री सेल्सियस अधिक है। गर्मी में शरीर के लिए सबसे बड़ी जरूरत पानी है। लेकिन इसे गलत तरीके से पिया जाए तो यह शरीर के लिए नुकसान भी पंहुचा सकता है। डॉक्टर सुझाव देते हैं कि गर्मी से आने के बाद तत्काल बहुत ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। वैसे भी फ्रिज के पानी को पीने से बहुत लोग बचते हैं। वह मिट्टी के बर्तनों को वरीयता देते हैं। जानकार बताते हैं की मिट्टी के छिद्रों से पानी के वाष्पीकरण के कारण पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है। फ्रिज के पानी के मुकाबले मटके का पानी गले के लिए भी अच्छा माना गया है। कुम्हार दीपक प्रजापति बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों से मिट्टी के बने बर्तनों की मांग बढ़ी है। इसलिए गर्मी आने के पहले ही बर्तनों को बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाता है। बर्तनों में अब नया-नया प्रयोग होने लगा है। जैसे सुराही और घड़े में अब प्लास्टिक की टोटी लगा दी जाती है जिससे लोगों को पानी निकालने में दिक्कत का सामना न करना पड़े और पानी बर्बाद भी ना हो। उन्होंने बताया इसी के साथ मिट्टी के गिलास, दही जमाने के लिए बर्तन यानी किचन में उपयोग करने वाले ज्यादातर बर्तनों को अब मिट्टी का आकार दिया जा रहा है। बर्तनों में खूबसूरती दिखने के कारण यह बाजार में अच्छे दाम पर बिक जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष अब इसकी मांग बढ़ते क्रम में है। जिससे कुम्हारों को अपने व्यवसाय के प्रति एक नया उत्साह जागृत हुआ है।

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