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दिल्ली में क्यों धमाल मचा रहा है कोरोना

बीते 18 नवंबर 2020 को 24 घंटों में पूरे हिंदुस्तान में कोरोना के 38,617 नये केस सामने आये, जो कि पिछले 44 दिनों में सबसे कम थे। जबकि ठीक इसी दिन दिल्ली में 7,486 कोरोना के नये केस सामने आये, जो कि अब तक में किसी एक दिन दिल्ली में सामने आये सबसे ज्यादा केस थे।

सवाल है जब अक्टूबर 2020 के अंतिम सप्ताह में यह लगने लगा था कि देशभर से कोरोना अब विदाई की मुद्रा में है और नवंबर लगने के बाद आंकड़ों के रू प में ऐसा सामने भी आया, जब कई दिनों तक लगातार 50,000 से कम मामले सामने आये। ठीक उसी समय दिल्ली में आखिर कोरोना का कहर क्यों टूट पड़ा है? एक आम आरोप है कि दिल्ली में लोग बेहद लापरवाह हो गये थे और किसी भी तरीके से कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे थे।

निश्चित रूप से इसमें सचाई का एक हिस्सा है, लेकिन इन आरोपों में जो दबे छुपे अंदाज में यह कहा जा रहा था कि दिल्ली में आम गरीब लोग कोरोना गाइडलाइन का बिल्कुल पालन नहीं कर रहे, उनकी वजह से कोरोना का संक्रमण तेजी से फैला है, वह सही नहीं है। इसकी पुष्टि आश्चर्यजनक ढंग से अलग अलग इलाकों के कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या कर रही है।

दिल्ली में सर्वाधिक पॉश इलाके दक्षिण और पश्चिम दिल्ली में हैं और सर्वाधिक गरीब बस्तियां उत्तर पूर्व और पूर्वी दिल्ली में हैं। अगर दिल्ली में कोरोना संक्र मण के सरकारी आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि जो इलाका जितना पॉश, साक्षर और सम्पन्न है, कोरोना के मामले में भी वह उतना ही सम्पन्न साबित हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस समय दिल्ली के सबसे पॉश और हरियाली वाले दक्षिण पश्चिम जिले में कोरोना के सबसे ज्यादा 6,391 एक्टिव केस हैं।

उसके बाद दक्षिण जिले में 5,815, उत्तर पश्चिम जिले में 5,255, दक्षिण पश्चिम में 5,013 और पश्चिम जिले में 4,895 कोरोना के एक्टिव केस हैं यानी सम्पन्न दिल्ली में कोरोना के मामले भी खूब सम्पन्न हैं। जबकि झुग्गियों से भरपूर गरीब आबादी वाले इलाकों से पटे उत्तर पूर्वी दिल्ली में कोरोना के एक्टिव केस महज 918 हैं।

गौरतलब है कि इसी जिले में सीमापुरी और सीलमपुर जैसे दिल्ली के बेहद गरीब इलाके आते हैं। सीमापुरी झुग्गियों के लंबे क्लस्टर से भरा हुआ है, जबकि सीलमपुर गरीब मुस्लिम आबादी का गढ़ है, लेकिन कोई सरलीकरण करे इसके पहले यह भी जान लीजिए कि नेताओं और नौकरशाहों वाली नई दिल्ली में भी कोरोना के बहुत कम केस, महज 1980 हैं। इन आंकड़ों से तो साफ होता है कि लापरवाही कोरोना के तूफानी कहर की वजह शायद नहीं है।

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