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अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार की गुंजाइश है- गडकरी  

नयी दिल्ली। जीएसटी व्यवस्था के चार साल पूरा होने के मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह कर सुधार काफी महत्वपूर्ण और जरूरी था। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि इस अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार की गुंजाइश है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे गडकरी ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों और शराब को जीएसटी व्यवस्था में लाने के लिये राज्यों के साथ आम सहमति बनाने की जरूरत है क्योंकि देश में संघीय ढांचा है।

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दिवस पर इंस्टीट्यूट आॅफ कॉस्ट एकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया (आईसीएआई) के एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा,   यह कर सुधार (जीएसटी) काफी जरूरी था…हालांकि जीएसटी लागू हुए चार पूरे हो गये हैं, मुझे लगता है कि इसमें सुधार की गुंजाइश है तथा हम संबंधित पक्षों के साथ मिलकर इसे और बेहतर बना सकते हैं।

देश भर में जीएसटी एक जुलाई, 2017 से लागू हुआ। इसमें उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट जैसे 17 स्थानीय कर समाहित हुए। बेबाक टिप्पणी के लिये जाने जाने वाले गडकरी ने यह भी कहा कि जीएसटी से जुड़ी कुछ समस्याएं अभी भी एमएसएमई क्षेत्र के लिये कठिनाइयां पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब एमएसएमई किसी सामग्री का बिल बनाते हैं और उन्हें संबंधित कंपनियों को देते हैं, तो यह उनकी (एमएसएमई) जिम्मेदारी है कि भले ही वे भुगतान प्राप्त करें या नहीं, उन्हें कर जमा करना आवश्यक है।

मंत्री ने कहा,   और सरकार में, खासकर एमएसएमई के साथ बहुत सारी समस्याएं हैं। उन्हें देरी से भुगतान हमारे लिए एक बड़ी समस्या है। और सभी छोटे एमएसएमई पहले से ही समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका कुछ रास्ता निकालने की जरूरत है, ताकि लोगों को कुछ राहत मिल सके। मंत्री ने कहा,   राज्य, उनके उपक्रम, केंद्र, उनके उपक्रम, विभिन्न विभाग, बड़े उद्योग और बड़े लोग एमएसएमई को समय पर भुगतान नहीं करते…इसके कारण कई सारे आर्थिक समस्याएं पैदा होती हैं। गडकरी ने कहा कि जीएसटी से 2025 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जीएसटी  एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर  की धारणा पर लागू किया गया है। इसने मौजूदा महामारी की स्थिति के बावजूद व्यापार और उद्योग को बहुत मदद की है। गडकरी ने कहा कि भारत में दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की पूरी क्षमता है। उन्होंने अपने मंत्रालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा,   हम देश में बुनियादी ढांचे के विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। हम प्रतिदिन 38 किमी सड़क का निर्माण कर रहे हैं। हम हरित राजमार्ग बना रहे हैं।

मंत्री ने अधिक-से-अधिक रोजगार सृजित करने पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिये देश को और निवेश तथा प्रौद्योगिकी को उन्नत बनाने की जरूरत है।

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