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युवा प्रतिभा की त्रासदी और व्यवस्था पर करारा व्यंग्य-‘अश्वासनम्’ में झलकी बेरोजगारी की पीड़ा

लखनऊ। भारतोदय संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पंद्रह दिवसीय प्रस्तुतिपरक संस्कृत नाट्य कार्यशाला के उपरांत संस्कृत नाटक ‘अश्वासनम्’ का मंचन आज दिनांक 20 मार्च 2026 को शांति इंटर कॉलेज, भरत नगर, लखनऊ के सभागार में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जुहारी देवी गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर की प्राध्यापक रेखा शुक्ला एवं समर्थनारी-समर्थभारत की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती नीरा सिन्हा ‘वर्षा’ ने उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्र के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर किया। डॉ. ओम प्रकाश त्रिपाठी द्वारा रचित इस संस्कृत नाटक का निर्देशन जूही कुमारी ने किया। कार्यशाला के दौरान नाट्य प्रशिक्षण जूही कुमारी तथा संस्कृत प्रशिक्षण डॉ. आनन्द कुमार दीक्षित द्वारा प्रदान किया गया।


नाटक के पूर्वरंग में विचित्र वेशधारी नेता और प्रतिभाशाली युवक के माध्यम से व्यंग्यपूर्ण नांदी प्रस्तुत की गई, जिसके बाद एक मार्मिक और त्रासदीपूर्ण कथा सामने आई। नाटक का केंद्रीय पात्र एक प्रतिभाशाली, उत्साही और आशावान युवक है, जो समाज, परिवार, साहित्य, दर्शन और धर्म के लिए कुछ करने की आकांक्षा रखता है, किन्तु आजीविका की तलाश में निरंतर असफलताओं, कुण्ठा और तिरस्कार का सामना करता है।


कथानक में उसकी सहपाठिनी प्रतिभा का भावनात्मक सहयोग, मित्र सुबोध द्वारा नेता से मिलवाना और नेता के आश्वासनों के बीच पनपती आशा को दर्शाया गया है, जो अंततः तीन वर्षों तक केवल आश्वासनों में ही सीमित रह जाती है। व्यवस्था की विसंगतियों और सिफारिश-प्रधान तंत्र के कारण युवक का संघर्ष और गहराता जाता है।

आयु-सीमा समाप्त होने के साथ ही निराशा के चरम पर पहुंचा युवक जीवन से विरक्त हो जाता है। हालांकि उसके मित्र उसे बचाने का प्रयास करते हैं। नाटक का समापन “हाथ-हाथ को काम मिले” जैसे सार्थक भरत वाक्य के साथ हुआ, जो रोजगार की आवश्यकता और व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। नाटक में ज्ञानेंद्र मिश्रा, सुंदरम मिश्रा, आयुष, सत्यम मिश्रा, तन्मय, कुमारी श्वेता और स्नेह सहित अन्य कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति युवाओं की बेरोजगारी की समस्या को उजागर करते हुए सामाजिक व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य करती है और दर्शकों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित करती है।

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