लखनऊ। मंगला गौरी का व्रत हर साल सावन मास के मंगलवार के दिन रखा जाता है। ऐसे में सावन में आने वाले सभी मंगलवार का विशेष महत्व होता है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं औक कुंवारी कन्या दोनों ही रखती हैं। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है। मंगला गौरी व्रत को बहुत ही शुभ फलदायी बताया गया है। आइए जानते हैं इस बार कितने मंगला गौरी व्रत होंगे साथ ही जानते हैं इस व्रत की क्या है तारीख।
मंगला गौरी व्रत की शुरूआत मंगलवार 4 अगस्त से होगी। इस बार कुल 4 मंगला गौरी व्रत होंगे। इस दिन माता पार्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। सुहागन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती है। जबकि वहीं, कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए इस व्रत को रखती हैं।
पहले मंगला गौरी व्रत पर बन रहे हैं 3 शुभ योग
सावन मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शिव और विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर तीन शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इसे और भी खास बना देता है। जिन नवविवाहित महिलाओं का यह पहला सावन है, उनके लिए इस व्रत से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है। साल 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को पड़ेगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी, जो रात 10:03 बजे तक प्रभावी होगी।
इस दिन तीन शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग। ये सभी योग रात 9:54 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। वहीं दिन के समय धृति योग सुबह से लेकर शाम 7:33 बजे तक रहेगा, इसके बाद शूल योग प्रारंभ होगा। नक्षत्रों की बात करें तो रेवती नक्षत्र सुबह से रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा।
मंगला गौरी व्रत का महत्व:
मंगला गौरी व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए रखती है। साथ ही घर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। इसके लिए भी यह व्रत रखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से पति पत्नी के बीच के रिश्ते मधुर होते हैं। इसके अलावा संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है। यदि किसी कन्या के विवाह में बाधाएं आ रही है मांगलिक दोष है तो वह भी इस व्रत को रख सकते हैं।
पूजा विधि:
सावन के पहले मंगला गौरी व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद साफ लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। फिर चौकी पर मां गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। व्रत का संकल्प लेकर आटे से बना हुआ दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद धूप, नैवेद्य फल.फूल आदि से मां गौरी का पूजन करें। पूजा पूर्ण होने पर मां गौरी की आरती करें और उनसे प्रार्थना करें।





