नाटक दो-अकेली का सफल मंचन
लखनऊ। श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति लखनऊ द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली के रिपेट्री ग्रांट वर्ष 2025-26 की द्वितीय प्रस्तुति के रूप में दो-अकेली का नाट्य मंचन अनुपम बिसारिया के कुशल निर्देशन में बौद्ध शोध संस्थान में मंचित किया गया। मंचन से पूर्व मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति गिरीश चन्द्र मिश्र द्वारा दीप प्रज्जवलित कर नाटक से संबंधित समस्त कलाकारों को आशीर्वाद प्रदान किया गया इसके पश्चात् संस्था के आलोक कुमार पाण्डे संरक्षक एवं अचला बोस संस्थापिका/अध्यक्ष द्वारा मुख्य अतिथि महोदय को अंग वस्त्र तथा स्मृति चिन्ह एवं पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। नाटक के कथानक के अनुसार एक माँ से पैदा दो सगी बहनें एक घर में दो सगे भाइयों से ब्याही जाती हैं। बड़ी बहन नसीबन जिसका शौहर अव्वल दर्जे का अय्याश होता है, जब तक जिंदा रहा उसको मारता पीटता रहा, उसकी जिन्दगी दोजख बना दी वह सब कुछ सहती रही इसी उम्मीद पर के एक दिन उसका बेटा जलाल बड़ा होकर उसका सहारा बनेगा, उसके गम बाँटेगा मगर जलाल आस्मा से शादी होने के बाद अपनी बीवी और बेटे छोटू को लेकर अलग रहने चला जाता है और नसीबन एक बार फिर अकेली, तन्हा रह जाती है।
दूसरी तरफ छोटी बहन जीनत निकाह होते ही विधवा हो जाती है अब ना कोई आस ना औलाद उसे नसीबन ही सहारा देती है दोनों मिलकर जलाल और छोटू पर अपनी मोहब्बत निसार करती है मगर उनके घर छोड़ने पर दोनों एकदम तन्हा और अकेली रह जाती हैं ना कोई रिश्तेदार ना कोई दु:ख बाटने वाला सिर्फ पेट पालने के लिये स्कूल के बच्चों को भुट्टे सेंक कर बेचती है और किसी तरह अपना गुजारा करती हैं। लेकिन पूरा दिन रोज एक जिन्दगी की तरह काटना पड़ता है कभी लड़ती हैं, कभी प्यार जताती हैं, कभी एक दूसरे पर इल्जाम लगाती हैं कभी रूठती हैं फिर खुद ही एक दूसरे को मनाती हैं बस यही जिन्दगी का सफर है, इस नाटक का यहां पर समापन होता है। नाटक के मुख्य पात्रों में नसीबन की भूमिका में सुषमा शुक्ला तथा जीनत की भूमिका में अनीता वर्मा, सज्जन मियां की भूमिका में अनुपम बिसारिया नाट्य निर्देशक एवं जलाल की भूमिका में योगेश शुक्ला तथा छोटू की भूमिका में वंश शुक्ला ने अपने सश्क्त अभिनय से रंग दर्शकों को अत्यधिक प्रभावित किया।





