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अखण्ड सौभाग्य के लिए सुहागिनें आज रखेंगी वट सावित्री व्रत

लखनऊ। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है । इसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है। इस व्रत को बरगदाही व्रत भी कहते हैं। महिलाएं यह व्रत अखण्ड सौभाग्य के लिये करती हैं। इस व्रत में उपवास रखते है। ये व्रत सावित्री द्वारा अपने पति को पुन: जीवित करने की स्मृति के रूप में रखा जाता है। इस बार वट सावित्री व्रत 26 मई को है। वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है। इसकी जड़ों में ब्रह्नााजी, तने में विष्णु जी का और डालियों और पत्तियों में भगवान शिव का वास माना जाता है। वट वृक्ष की पूजा से दीघार्यु, अखण्ड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है।

वट सावित्री व्रत पर दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग
इस साल वट सावित्री व्रत पर कई विशेष और दुर्लभ ज्योतिषीय योग बन रहे हैं, जो इस दिन को और अधिक पुण्यदायी और प्रभावशाली बना रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ रही है, जिसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं में सोमवती अमावस्या को अत्यंत शुभ और सौभाग्यवर्धक माना गया है, खासकर महिलाओं के लिए जो अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं।
इसके अलावा, इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेंगे, जो मानसिक स्थिरता, प्रेम और वैवाहिक सौहार्द का प्रतीक माने जाते हैं। यही नहीं, इस दिन आकाश में कुछ और बेहद शक्तिशाली योग भी बन रहे हैं बुधादित्य योग, जो बुद्धि, संवाद और निर्णय क्षमता को बढ़ाता है। मालव्य योग, जो सौंदर्य, विलासिता और सुख-संपन्नता से जुड़ा है। और त्रिग्रही योग, जो तीन ग्रहों की संयुक्त ऊर्जा से विशेष फल देता है।
इन सभी योगों के संयोग से वट सावित्री व्रत 2025 न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ संकेत लेकर आया है। व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह एक ऐसा अवसर है, जब उनका संकल्प कई गुना अधिक फल देने वाला सिद्ध हो सकता है।

पूजा विधि:
पं. बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि प्रात:काल स्नान आदि के बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य रख कर ब्रह्ना जी की मूर्ति की स्थापना कर फिर सावित्री की मूर्ति की स्थापना करते है और दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की मूर्तियों की स्थापना करके टोकरी को वट वृक्ष के नीचे जाकर ब्रह्ना तथा सावित्री के पूजन के बाद सत्यवान और सावित्री की पूजा करके बड़ बरगद की जड़ में जल देते है। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल तथा धूप से पूजन करते है। वट वृक्ष पूजन में तने पर कच्चा सूत लपेट कर 108 परिक्रमा का विधान है किन्तु न्यूनतम सात बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।

कच्चे धागे से मजबूत होगी रिश्तों की डोर :
सुहाग की कुशलता और समृद्धि की कामना का वट सावित्री व्रत सोमवार को है, लेकिन रविवार से इसका मान शुरू हो गया था। इस दिन सुहागिन बरगद के पेड़ के तने में 108 बार कच्चे धागे को परिक्रमा करके बांधती हैं और सात जन्मों तक रिश्ता मजबूत बना रहे इसकी कामना करती हैं। मानसनगर की रहने वाली संगीता वैसे तो हर साल तुलसी मानस मंदिर परिसर में लगे बरगद के पेड़ में धागा बांधती थीं, लेकिन इस बार गमले में धागा बांधकर पुरानी पररंपरा का निर्वहन करेंगी। आशियाना की पूजा मेहरोत्रा भी घर में गमले में ही पूजन करेंगी।

सुहागिनें मंगल कामना के लिए करेंगी उपवास:
इस दिन महिलाएं पतियों की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत धारण कर वट वृक्ष बरगद की पूजा करती हैं। महिलाएं अखंड सौभाग्यवती होने की मंगलकामना के साथ शनि भगवान का भी विशेष पूजन करेंगीं। वट वृक्ष की पूजा के बाद महिलाएं चने के प्रसाद के साथ व्रत खोलती हैं। इस दिन सूत, सिंदूर और फल आदि से वट वृक्ष का पूजन कर विविध पकवानों का प्रसाद वट वृक्ष को अर्पित करती हैं। वटसावित्री व्रत को लेकर बाजार में पूजन सामग्री और फलों की खरीदारी को लेकर महिलाओं में उत्साह दिखा।

बाजार में खूब बिकी बरगद की डाल व खरबूजा


वट वृद्ध की पूजा की परंपरा को लेकर दुकानदार पांच और सात पत्तों वाली बरगद की डाल बेच रहे हैं। मुंशी पुलिया के पास ठेले पर डाल बेचने वाले दुकानदार प्रमोद ने बताया कि पहली बार बरगद की डाल बेच रहे हैं। 11 पत्तों वाली डाल 21 रुपये और सात पत्तों वाली डाल 11 रुपये में बेच रहे हैं। आसपास के ग्रामीण इलाकों से डाल बेचने वाले राजधानी के कई इलाकों में नजर आए हैं। वट सावित्री व्रत को लेकर खरबूजा 30 रुपये किलो महंगा हो गया। इंदिरानगर के फल विक्रेता रमेश कुमार ने बताया कि वट सावित्री व्रत में खरबूजे की मांग सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में खरबूजा दोगुने दाम पर बिकता है।
वट सावित्री व्रत को लेकर सब्जी मंडी में बिक रहे खरबूजे ने रविवार को अचानक रंग बदल दिए। सुबह 50 रुपये किलो से शुरू हुए दाम 250 रुपये तक पहुंच गए। फल विक्रेताओं का कहना है कि वट सावित्री व्रत के पूजन के लिए खरबूजे की ज्यादा मांग है। वहीं, कुछ दिनों से कम उपलब्धता होने से भी कीमत ज्यादा है। भूतनाथ सब्जी मंडी के फल विक्रेता कहते हैं कि सुबह 50 रुपये से बिक्री शुरू हुई थी, शाम को बाजार बंद होते-होते 250 रुपये तक में लोग खरीद कर ले गए। राजाजीपुरम की अर्चना मिश्रा बताती हैं कि 100 रुपये का एक खरबूजा खरीदा है। जानकीपुरम की चमन कहती हैं कि निशातगंज से लेकर यहां तक देख लिया, कहीं खरबूजा नहीं मिला। रीना कहती हैं कि 140 रुपये किलो में बहुत मुश्किल से एक खरबूजा मिला है, वह भी बस काम चलाने लायक है। हालांकि, चौक निवासी पारुल, उषा व अन्य कहती हैं कि पुराने शहर में एक खरबूजा 50 रुपये का मिला है। दुबग्गा फलमंडी के आढ़ती आरिफ ने बताया कि 45 रुपये किलो थोक में खरबूजा बिका है।

वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सव एक ही दिन:
ज्येष्ठ माह की शुरूआत हो चुकी है और इस माह आने वाले सभी त्योहारों का विशेष महत्व है। इस माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि बेहद शुभ रहने वाली है। इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। बता दें वट सावित्री का उपवास ज्येष्ठ मास की अमावस्या और पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन उपवास करने से अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मिलता है। यह उपवास पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इस दौरान कुछ महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती है और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती भी मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को हुआ था। इस दिन इनकी पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शनिदेव की कृपा पाने के लिए यह तिथि बेहद ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि पर पूजा करने से व्यक्ति के रुके हुए कार्यों को गति मिलती है।

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