लखनऊ। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित गबन के हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को सरकार द्वारा 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता और वित्तीय अनियमितताओं के बड़े दायरे को देखते हुए जांच टीम ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और तकनीकी साक्ष्यों को खंगालने के लिए और वक्त की मांग की थी, जिसे मंजूर कर लिया गया है। इस समय विस्तार के बाद अब एसआईटी गबन के सटीक तौर-तरीकों, कुल राशि और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका को पूरी तरह स्पष्ट कर अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
अब तक की जांच में एसआईटी को चढ़ावे के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां और अनियमितताएं मिली हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर में लगीं ‘हुंडियों’ (दानपात्रों) की चाबियां नियमों के विपरीत अनधिकृत व्यक्तियों के पास थीं, जिसका फायदा उठाकर नकदी और बहुमूल्य सामग्रियां गायब की गईं। इसके अलावा, एसओपी (SOP) के तहत चढ़ावे की गिनती की सीसीटीवी फुटेज को निर्धारित 180 दिनों तक सुरक्षित रखने के बजाय केवल 45 दिनों में ही डिलीट कर दिया गया, जिसे रिकवर करने के लिए फॉरेंसिक टीमों की मदद ली जा रही है।
इस मामले में पुलिस और एसआईटी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नकदी व चढ़ावे की गणना से जुड़े आठ मुख्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिन्हें हाल ही में कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। पकड़े गए आरोपियों में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के करीबी और सिफारिशी कर्मचारी शामिल हैं। एसआईटी को मिले इस अतिरिक्त समय के दौरान बैंक लेन-देन, वित्तीय रिकॉर्ड्स और दानदाताओं को दी जाने वाली रसीदों के मिलान का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है, जिससे इस बड़े रैकेट की पूरी कड़ियां जोड़ी जा सकें।





