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शिवालयों में गूंजा बम-बम भोले, भक्तों ने लिया महादेव का आशीर्वाद

सावन के चौथे व अंतिम सोमवार पर राजधानी के सभी शिव मंदिरों में लगी श्रद्धालुओं की कतार, भोर में हुई भस्म आरती
लखनऊ। सावन के चौथे व अंतिम सोमवार पर बड़ी संख्या में भक्तों ने मंदिर पहुंचकर भोलेनाथ के दर्शन किए। बारिश के बावजूद भोर से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें लग गई। बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों से शिवालय गूंज उठे। सावन के चौथे सोमवार पर डालीगंज स्थित मनकामेश्वर मठ मंदिर, मोहान रोड स्थित बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, राजेंद्रनगर स्थित श्री महाकाल मंदिर, सदर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर, चौक स्थित कोनेश्वर, ठाकुर गंज स्थित पूर्वी मंदिर, बड़ा शिवालय, छोटा शिवालय और निरालानगर स्थित नर्मदेश्वर महादेव आदि मंदिरों में भक्तों ने पहुंचकर भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया। राजधानी के सभी शिवालयों में सुबह से ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे थे। कोई हर-हर महादेव तो कोई ओम नम: शिवाय के मंत्रों का उच्चारण कर रहा था, हर तरफ भोले बाबा के मंत्रों का जाप चल रहा था। राजधानी के ऐतिहासिक सिद्धपीठ मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरि ने श्रद्धालुओं के लिए आरती के साथ ही दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए थे।

मनकामेश्वर मठ मंदिर में 11 कलश जल से अभिषेक:
डालीगंज स्थित महादेव मंदिर के कपाट भक्तों के लिए सुबह पांच बजे खुल गए। आदि गंगा गोमती के11 कलश जल से भोलेनाथ का अभिषेक हुआ। एक कुंतल खीर का भोग लगाकर भक्तों के बीच प्रसाद बांटा गया। सुबह करीब नौ बजे तक भक्तों की भीड़ लगी रही। दिन भर भक्तों का मंदिर आने का सिलसिला जारी रहा। मनकामेश्वर मंदिर मे भोर से ही लोगों की कतारें लगनी शुरू हो गई थी। शिव भक्तो ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच दर्शन किए। महंत देव्या गिरि ने भोर की आरती की। उसके बाद 5:30 बजे पट दर्शन के लिए खोले गये।

महाकाल मन्दिर में हुआ रुद्राभिषेक:
राजेन्द्रनगर के महाकाल मन्दिर में सावन के चौैथे व अंतिम सोमवार को उज्जैन से मंगाया गया हरिहर जल से बाबा का अभिषेक हुआ। उसके बाद ब्रम्ह मुहूर्त में बाबा महाकाल की भस्म आरती हुई। उसके बाद भक्तों की ओर से महारुद्राभिषेक हुआ। रुद्राभिषेक में 51 लीटर दूध, 51 लीटर दही, सवा किलो शहद और सवा किलो शरकरा आदि पूजन सामग्री के साथ पूजन हुआ। शाम को 151 दीपों से महाकाल की भव्य आरती हुई। आरती के समय जय शिव ओंकारा तथा बाबा महाकाल के जयघोष से मन्दिर गूंज रहा था। अगले क्रम मे अमिताब अग्रवाल के सहयोग से बाबा को छप्पन भोग लगाया गया। बाद में छप्पन भोग प्रसाद को भक्तों को बांटा गया। जब बाबा का प्रसाद बंटा तो प्रसाद पाने के लिए भक्तों की लम्बी कतारे लग गई।

नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में 108 बेलपत्रों से हुआ अभिषेक:
सावन के चौथे व अंतिम सोमवार पर निराला नगर स्थित पांच पीढ़ियों से प्रतिष्ठित नर्मदेश्वर महामदेव मंदिर में सर्वकल्याण के लिए 108 बेलपत्रों से अभिषेक किया गया। रोशनी से जगमग मंदिर परिसर में शंखवादन और घंटों के साथ बाबा की स्तुति आचार्य के मागदर्शन में विधिवत की गई।

यहां भी हुए दर्शन:
सावन के अंतिम सोमवार पर चौक के कोतवालेश्वर, कोनेश्वर मन्दिर, ठाकुरगंज के कल्याण गिरि मन्दिर, रकाबगंज के सिद्धिनाथ मन्दिर, नागेश्वर मन्दिर, लालकुआं स्थित महाकालेश्वर मन्दिर, ठाकुरगंज के मां पूर्वी देवी एवं महाकालेश्वर मन्दिर, चौपटिया के बडा शिवाला और छोटा शिवाला में भी लोग दर्शन करने पहुंचे।

सिद्धेश्वर मंदिर में 16 वर्षों से जल रही अखंड ज्योति
लखनऊ। गोसाईंगंज स्थित सिद्धेश्वर महादेव धाम मंदिर बहुत प्राचीन है। करीब सात सौ वर्ष पुराने मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है। इस मंदिर में बीते 16 वर्षों से अखंड ज्योति निरंतर जल रही है। ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी और रक्षाबंधन पर इस मंदिर में नाग देवता भक्तों को दर्शन भी देते हैं। गोसाईंगंज कस्बा निवासी पंडित अंबिका प्रसाद मिश्रा बताते है कि मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है। ऐसा कहा जाता है कि मुगलशासन काल में कस्बे में एक मस्जिद का निर्माण कराया जा रहा था। इसके लिए कुछ दूरी पर मजदूर मिट्टी खोद कर ले जा रहे थे। इस दौरान एक जगह पर जब मजदूर मिट्टी खोद रहे थे तो उन्हें शिव लिंग सी आकृति दिखाई दी। देखते ही देखते वहां से सांप निकलने शुरू हो गए। यह देख मजूदर वहां से भाग खड़े हुए। इसकी जानकारी तत्कालीन मुगल शासक को दी गई। इसके बाद लोगों ने इस स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। स्थानीय लोग बताते है कि मंदिर और कस्बे के मध्य बनी मस्जिद के गुम्बदों की बनावट लगभग एक जैसी है।

भक्त दूर-दूर से आते हैं शिवलिंग के दर्शन के लिए :
मंदिर के पुजारी रामकरन गिरी बताते है मंदिर में बीते 15 वर्षों से निरंतर अखंड ज्योति जल रही है। वहीं करीब 20 वर्ष पहले कुछ भक्तों ने इस शिवलिंग को पारा व तांबे धातु के पत्तर से मढ़ाया था। इस सिद्ध शिवलिंग के दर्शन के लिए भक्त दूर दूर से आते हैं। ऐसी मान्यता है कि सुखी दाम्पत्य जीवन की कामना के साथ कस्बे समेत गांव-गांव से नव विवाहित जोड़े सिद्धेश्वर बाबा के दर्शन के लिए जरूर आते हैं। मंदिर के पुजारी श्री गिरी बताते हैं कि नागपंचमी और रक्षाबंधन को मंदिर में नाग देवता अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। वह बताते हैं कि हर माह शुक्लपक्ष की त्रयोदशी को मंदिर में रुद्राभिषेक किया जाता है।

उज्जैन की तर्ज पर हुई महाकाल की आरती
लखनऊ। सावन के चौथे व अंतिम सोमवार पर राजेंद्र नगर द्वितीय मार्ग स्थित महाकाल मंदिर में सुबह भस्म आरती के साथ दर्शन शुरू हो गए। संयोजक अतुल मिश्र ने उज्जैन की तर्ज पर महाकाल की आरती की तो पूरा परिसर शिवमय हो गया। महाकाल के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। मंदिर के बाहर शारीरिक दूरी के साथ ही एलईडी पर श्रद्धालुओं ने बाबा की आरती के दर्शन किए।

बाबा का दूध, बेसन, शहद और दही से किया अभिषेक:
डालीगंज के मनकामेश्वर मंदिर में सबसे पहले गोमती के जल से महादेव का जलाभिषेक हुआ उसके बाद बाबा का दूध, बेसन, शहद, दही, तिल, जौ व चन्दन से बाबा महाअभिषेक एवं रुद्राभिषेक किया। ढोल, नागफनी, डमरू, शंख, नगाड़ा, मजीरा की ध्वनि पर जब महाआरती हुई उस क्षण पूरा मंदिर प्रांगण हर हर महादेव और जय शिव शम्भू जयघोष से गूंज उठा। श्रावण का अंतिम सोमवार होने के कारण श्रद्धालुओ की लम्बी लाइन लगी रही।

अयप्पा मंदिर में हुआ रुद्राभिषेक:
गोमतीनगर के लॉर्ड अयप्पा मंदिर में रुद्राभिषेक शुरू हुआ। चौक के छोटा व बड़ा शिवाला के साथ ही कल्याण गिरि मंदिर में पुजारी ने बाबा का शृंगार किया और श्रद्धालुओं ने बाहर से ही दर्शन किए। कोनेश्वर मंदिर और कोतवालेश्वर मंदिर में केवल पुजारी ने ही बाबा का शृंगार किया। हनुमान सेतु मंदिर परिसर के शिव लिंग के दर्शन भी बाहर से किए गए। गुलाचिन मंदिर, पिपलेश्वर महादेव मंदिर, मौनी बाबा मंदिर, तुलसी मानस मंदिर और इंद्रेश्वर मंदिर समेत राजधानी के सभी शिव मंदिरों में सुरक्षा बंदोबस्त के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना की।

भक्तों ने किया भोलेनाथ का बर्फ से शृंगार
लखनऊ। सावन के सोमवार और त्योहारों पर भगवान शिव को महाकाल या अन्य दिव्य स्वरूपों में सजाया जाता है। इसी के तहत सोमवार को डालीगंज ढलाईघर के भोलेश्वर महादेव मंदिर में बाबा भोलेनाथ का भव्य बर्फ का श्रृंगार और मनोरम झांकी सजाई गई। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्घालुओं ने बाबा के दर्शन् किये और पूजा करते हुए अपनी मनोकामना की मन्नत मांगी। इस वर्ष बर्फ के श्रृंगार का आकर्षण बर्फ पर नक्काशी से कैलाश पर्वत की श्रृंखलाओं एवं झरनों का भव्य दृश्य रहा। स्थानीय नागरिकों के सहयोग से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेश्वर महादेव के दिव्य स्वरूप के दर्शन किये। महादेव मंदिर में बाबा भोलेनाथ का भव्य और आकर्षक श्रृंगार किया गया। भक्तों ने फूलों, भांग, चंदन, और आभूषणों से सजे भगवान शिव के अलौकिक रूप के दर्शन किये। इस दौरान भक्तों के बीच महाआरती के बाद प्रसाद बांटा गया। इस दौरान महामंत्री अनिल कुमार अग्रवाल, डॉ.शिव श्ांकर अग्रवाल, लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, प्रदीप बंसल, जितेन्द्र बसंल और राजीव अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

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