लखनऊ। 25 अगस्त मंगलवार को श्रावण महीने का चौथा मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रहती हैं। साथ ही कुंवारी युवतियां भी मनोवांछित वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। श्रावण अधिक मास के मंगल गौरी व्रत के दिन उपवास रखकर माता गौरी की पूजा करके उनसे ऋण मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। मंगलवार के दिन गुड़ और चने का प्रसाद बांटें। मंगल के दिन वटवृक्ष के 11 पत्तों पर 11 आटे के दीपक रखकर उसमें चमेली का तेल डालकर हनुमान मंदिर में जलाएं। कर्ज से मुक्ति के रास्ते मिलेंगे। मंगला गौरी व्रत के दिन विधिवत रूप से मंगला गौरी माता, मंगल देव और हनुमान जी की पूजन करके मंत्र ॐ हनुमते नम:, श्री मंगला गौरी मंत्र- ॐ गौरीशंकराय नम: का 108 बार जप करें। मंगल के दिन किसी को ऋण न दें, बल्कि ऋण चुकता करें। इस दिन कर्ज चुकाने से फिर कभी ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। साथ ही ऋण मोचन अंगारक स्तोत्र का पाठ करने से भी कर्ज से छुटकारा मिलता है।
मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
लखनऊ। मंगला गौरी व्रत सावन महीने के हर मंगलवार को रखा जाता है। यह तिथि माता पार्वती को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि, महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और प्रेम जीवन की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। धार्मिक ग्रंथों में इस उपवास को दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ाने वाला भी माना जाता है। साथ ही ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से मंगल दोष से राहत मिलने की भी मान्यता है। ऐसे में सावन के आखिरी मंगलवार को पूरे विधि-विधान से पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सकता है। सावन मास का चौथा और आखिरी मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस दिन उत्तराषाढा नक्षत्र बन रहा है और आयुष्मान का संयोग भी पूजा के लिए भक्तों को प्राप्त हो रहा है। ऐसे में पूजा करना और भी लाभकारी हो सकता है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत की पूजा के लिए एक साफ चौकी पर माता पार्वती और भगवान शिव की तस्वीर स्थापित करें। माता पार्वती को लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें और उनका श्रृंगार करें। वहीं महादेव को चंदन लगाएं और बेलपत्र अर्पित कर दें। पूजा में आप पान, फल, मिठाई, इलायची, लड्डू, सुपारी और फूल आदि अर्पित करें। इस समय देवी को सुहाग का सामान भी जरूर चढ़ाएं, इससे रिश्तों में सुख-शांति की कामना पूरी होती हैं। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और धूपबत्ती अर्पित करें। माता को पांच प्रकार के मेवे और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य भोग अर्पित करें। मंगला गौरी व्रत की कथा का पाठ अवश्य करें और भगवान शिव-माता पार्वती का ध्यान करें। अंत में आरती करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।





