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भातखण्डे की कार्य परिषद बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर लगी मुहर

लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की महत्वपूर्ण बैठक कुलपति प्रो. मांडवी सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय एवं सांस्कृतिक विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया तथा विश्वविद्यालय के हित में अनेक महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अनुमोदन प्रदान किया गया। बैठक में कार्य परिषद के सदस्य के रूप में मालिनी अवस्थी, प्रो. उमा गर्ग, प्रो. मंजुला चतुवेर्दी, वित्त नियंत्रक संस्कृति निदेशालय उ0 प्र0 कृष्ण कुमार पाण्डेय, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रो0 अश्वनी कुमार मिश्र, विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस. पी. सिंह, वित्त अधिकारी मनीष कुमार कुशवाहा समेत विश्वविद्यालय की गायन एवं स्वरवाद्य विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर, नृत्य विभाग के विभागाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेयी बैठक में उपस्थित रहे। बैठक में विश्वविद्यालय की संगीत एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए संगतकर्ता के रूप में कार्य करने हेतु पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके लिए 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित नियमों एवं मानकों के अनुसार सम्पन्न की जाएगी।
विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उत्तरपुस्तिकाओं के संरक्षण की अवधि तीन वर्ष निर्धारित किए जाने का निर्णय लिया गया। इससे आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा संबंधी अभिलेखों को सुरक्षित रूप से उपलब्ध कराया जा सकेगा तथा उनका व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित होगा। बैठक में विश्वविद्यालय के संगठक हरिहरपुर महाविद्यालय, आजमगढ़ से संबंधित प्रस्ताव पर विचार करते हुए विद्यार्थियों के हित में शैक्षणिक शुल्क को आधा किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस निर्णय से महाविद्यालय के विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय में रिक्त पदों के लिए प्राप्त आवेदनों की शीघ्र संवीक्षा कर संवीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को भी कार्य परिषद द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया। इससे रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। विश्वविद्यालय के विभिन्न विषयों में शैक्षणिक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अस्थायी विषय विशेषज्ञों के चयन संबंधी प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की गुणवत्ता एवं व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए परीक्षा नियंत्रक द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। कार्य परिषद ने परीक्षा प्रक्रिया में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं सुव्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। बैठक में विश्वविद्यालय में पूर्व में प्रदान की गई अनुकंपा नियुक्ति का भी अनुमोदन किया गया। कार्य परिषद द्वारा संबंधित प्रकरण पर विचार करने के उपरांत आवश्यक स्वीकृति प्रदान की गई। विश्वविद्यालय में नियमानुसार लोकपाल की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव को भी कार्य परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। इससे विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार से जुड़े मामलों के निस्तारण की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
विश्वविद्यालय में प्रस्तावित वित्तीय परिषद के गठन एवं उसकी कार्यप्रणाली से संबंधित प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्य परिषद ने वित्तीय प्रशासन को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से संबंधित प्रस्ताव का अनुमोदन किया। विश्वविद्यालय के प्रमुख सांस्कृतिक मंच कला मंडपम प्रेक्षागृह को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ एवं सुविधासंपन्न बनाने पर भी कार्य परिषद में विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विद्यार्थियों, कलाकारों एवं दर्शकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने तथा बड़े स्तर के सांस्कृतिक आयोजनों के लिए मंच की उपयोगिता बढ़ाने के उद्देश्य से कला मंडपम के सुदृढ़ीकरण एवं आवश्यक सुधार कार्य कराए जाने का निर्णय लिया गया। बैठक में आधुनिक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के पुनर्जागरण के अग्रदूत एवं विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे जी की जयंती को और अधिक भव्य एवं व्यापक स्तर पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया। आगामी भातखण्डे समारोह को बसंत पंचमी से तीन दिवसीय भव्य भातखण्डे महोत्सव के रूप में आयोजित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य भारतीय संगीत, नृत्य एवं अन्य ललित कलाओं की समृद्ध परंपरा को आधुनिक आवश्यकताओं के साथ जोड़ते हुए विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षण एवं व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। कार्य परिषद द्वारा लिए गए निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय एवं सांस्कृतिक विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव एस. पी. सिंह ने बताया कि कार्य परिषद द्वारा अनुमोदित सभी प्रस्तावों को निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के अनुसार प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कला मंडपम का सुदृढ़ीकरण, परीक्षा व्यवस्था में सुधार, शैक्षणिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना तथा भातखण्डे महोत्सव का व्यापक आयोजन विश्वविद्यालय की गतिविधियों को और अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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