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स्ववित्तपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को नहीं मिला वेतन

– कई शिक्षकों ने उच्च शिक्षा निदेशक से की शिकायत

– लविवि से मांगा गया कॉलेजों के शिक्षकों का डाटा

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध करीब 120 स्ववित्तपोषित डिग्री कॉलेजों में से आधों से अधिक ने अभी तक शिक्षकों को मार्च माह का वेतन नहीं दिया है। इसकी शिकायत इन कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों ने उच्च शिक्षा निदेशक के यहां दर्ज की है, जिसके बाद इन सभी शिक्षकों को मार्च व अप्रैल का वेतन दिलाने के लिए उच्च शिक्षा निदेशक ने लखनऊ विश्वविद्यालय से सभी कॉलेजों की अप्रूर्व शिक्षकों की सूची मांगी है। जिसे यह पता चल सके कि जिन शिक्षकों ने शिकायत दर्ज कराई वह कॉलेज में पढ़ा भी रहे है या नही।

कई कॉलेजों में दिसंबर सेमेस्टर परीक्षा के रिजल्ट देर से आने के कारण छात्रों ने अभी तक अगले सेमेस्टर में बैठने के लिए काउंसिलिंग तक नहीं कराया हैं। ऐसे में इन कॉलेजों को सेमेस्टर की फीस नहीं मिल सकी है। ऐसे में इन कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के सामने वेतन का संकट खड़ा हो गया है। कॉलेज प्रबंधकों का कहना है कि जब फीस ही नहीं आ रही है तो वह वेतन कहां से दे? उन्होंने पढ़ा रहे शिक्षकों को हालात ठीक होने तक शांत रहने को कहा है।

लखनऊ विश्वविद्यालय सम्बद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि 50 से अधिक कॉलेजों में वेतन नहीं मिलने की शिकायत सामने आई है। इस सम्बद्ध में विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव से चर्चा तक की गई है लेकिन इसके बाद भी इस मामले पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में इन डिग्री कॉलेजों में काम करने वाले शिक्षकों ने संघ और उच्च शिक्षा अधिकारी तक से गुहार लगाई है। उन्होंने सभी शिकायतों की जांच कर कॉलेजों पर कार्रवाई करने की बात कहीं है।

क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि जो भी शिक्षक शिकायत कर रहा है। उसकी शिकायत के बाद उस सम्बद्धित कॉलेज की शिक्षकों की पूरा विवरण विश्वविद्यालय से मांगा जा रहा है ताकि इसकी जांच हो सके, शिकायत करने वाले शिक्षक उसे कॉलेज में पढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय से स्वीकृति मिली है या नहीं। इसके बाद इन कॉलेज प्रबंधकों से शिक्षकों का वेतन विवरण मांगा जाएगा। यदि कोई कॉलेज वेतन नहीं दे रहा होगा, उस पर कार्रवाई करते हुए शिक्षकों का वेतन दिलवाया जायेगा।

वित्त विहीन शिक्षकों के लिए सिर्फ पांच हजार रुपये की मांग

इधर माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता व प्रदेशीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ राय ने मांग की है प्रदेश के स्ववित्तपोषित इंटर कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को पांच हजार रूपये प्रतिमाह की सहायता राशि सरकार प्रदान करें। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी से इस समय पूरा देश परेशान है। इस आपदा की घड़ी में प्रदेश सरकार द्वारा गरीब मजदूरों को भी 1000 प्रतिमाह सहयोग राशि प्रदान की जा रही है, ऐसे में वित्तविहीन शिक्षक जो अत्यंत ही विपरीत परिस्थितियों में पूरी तन्मयता के साथ कार्य करते हुए 90% शिक्षा व्यवस्था को संचालित कर रहा है, उसके विषय में सोचना भी प्रदेश सरकार का दायित्व है।

प्रदेश सरकार से हमने अपील की है कि प्रत्येक वित्तविहीन शिक्षक साथी के खाते में कम से कम 5000 न्यूनतम आर्थिक सहायता प्रदान किया जाय। शिक्षा मंत्री से मांग की यदि सरकार वित्तविहीन शिक्षक साथियों को आर्थिक राहत नहीं दे पा रही है, तो आप वित्तविहीन शिक्षकों के लिए एक राहत कोष का गठन करवायें जिसमें सारे शिक्षक संगठन व सरकार प्रयास करके एक बड़ी धनराशि एकत्रित करवाएं, जिसके द्वारा प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालय तक के वित्तविहीन शिक्षक साथियों का सहयोग किया जा सके।

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