लखनऊ। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस पवित्र महीने में महादेव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही हर सोमवार और मंगलवार को व्रत किया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस बार सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त को किया जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं। अविवाहित कन्याएं मनचाहा और योग्य वर प्राप्त करने के लिए यह व्रत पूरी श्रद्धा से करती हैं। मां मंगला गौरी की कृपा से घर-परिवार से कलह और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इससे पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन सुखमय बना रहता है। वहीं, जिन युवतियों का विवाह नहीं हुआ है या शादी में बाधाएं आ रही हैं, वे भी यह व्रत रखती हैं। माना जाता है कि मंगला गौरी व्रत से जल्द विवाह के योग बनते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि:
मंगला गौरी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और दिन की शुरूआत महादेव और माता पार्वती के ध्यान से करें। इस दिन हरा, लाल, गुलाबी और पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। अब मंदिर की सफाई कर संकल्प लें। माता पार्वती को 16 श्रृंगार अर्पित करें और शिव जी को धतूरा और बेलपत्र समेत आदि चीजें चढ़ाएं। अब देशी घी का दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का उच्चारण करें। पूजा के दौरान मां मंगला गौरी की व्रत कथा पढ़ें। मां माता पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन और पति की दीघार्यु की कामना करें। अंत में फल, मिठाई और खीर समेत आदि चीजों का भोग लगाएं।
मंगला गौरी व्रत के उपाय :
मंगला गौरी व्रत के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद माता पार्वती की पूजा करें। सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से विवाह में आ रही बाधा दूर हो जाती है।





