नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा आभूषण निर्यातक कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ सख्त अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद घरेलू शेयर बाजार में हड़कंप मच गया है। बाजार नियामक ने कंपनी पर व्यापक वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग न करने और अपने राजस्व को 97 से 99 प्रतिशत तक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद गुरुवार को बाजार खुलते ही राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई और कंपनी का स्टॉक बीएसई पर अपने पिछले बंद 110.15 रुपये की तुलना में 4.99 प्रतिशत टूटकर 104.65 रुपये पर आ गया, जिसके साथ ही इसमें लोअर सर्किट लग गया। गौरतलब है कि सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय ने इन गड़बड़ियों को बेहद गंभीर और अभूतपूर्व बताते हुए निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप को जरूरी माना है। नियामक ने प्रमोटर राजेश मेहता के शेयरों के लेन-देन पर पूरी तरह रोक लगा दी है और कंपनी को नए फॉरेंसिक ऑडिटर की जांच में सहयोग करने तथा 30 दिनों के भीतर सभी लंबित जानकारियां देने का कड़ा निर्देश दिया है।
इस बड़ी नियामकीय कार्रवाई की सीधी आंच देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) पर भी आई है। चूंकि एलआईसी के पास राजेश एक्सपोर्ट्स में लगभग 10 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए इस नकारात्मक खबर से निवेशकों में घबराहट फैल गई और कारोबार के दौरान एलआईसी का शेयर भी करीब 1 प्रतिशत तक गिर गया।
सेबी की जांच में यह बात सामने आई है कि अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच कंपनी ने फॉरेंसिक ऑडिटर ‘बीडीओ इंडिया सर्विसेज’ को अपने मूल वित्तीय रिकॉर्ड और लेखा प्रणालियों की पहुंच नहीं दी थी। इसके अलावा सिंगापुर और स्विट्जरलैंड स्थित विदेशी सहायक कंपनियों के जरिए फंड को इस तरह घुमाने का आरोप है जिससे उनके वास्तविक स्रोत को छुपाया जा सके। मार्च 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद शुरू हुई इस जांच ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है, जिससे राजेश एक्सपोर्ट्स सहित इसमें बड़ा निवेश रखने वाली एलआईसी के पोर्टफोलियो पर भी दबाव साफ देखा जा रहा है।





